उपेंद्र कुशवाहा के कुनबे में खलबली बंद कमरे में माधव आनंद और आलोक सिंह के साथ क्या खिचड़ी पकी?

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना मौसम के पूर्वानुमान से भी ज्यादा मुश्किल होता है। इन दिनों राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) काफी चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने एक ऐसी बैठक की है, जिसने पटना के सियासी गलियारों में कानाफूसी बढ़ा दी है।

उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी के दो प्रमुख स्तंभों  विधायक माधव आनंद और आलोक सिंह के साथ एक गंभीर मीटिंग की।

क्या चल रहा है अंदर?

राजनीति को समझने वाले जानते हैं कि जब पार्टी सुप्रीमो अपने विधायकों के साथ 'वन-टू-वन' बात करता है, तो बात सामान्य नहीं होती। माधव आनंद हमेशा से कुशवाहा के "चाणक्य" माने जाते रहे हैं, वहीं आलोक सिंह का भी अपना प्रभाव है। इन तीनों के बीच हुई यह मुलाकात बताती है कि कुशवाहा अपनी पार्टी (RLM) को मजबूत करने और शायद एनडीए (NDA) गठबंधन के अंदर अपनी स्थिति को लेकर कोई नई रणनीति तैयार कर रहे हैं।

कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को लेकर यह 'फीडबैक' मीटिंग थी। कुशवाहा जानना चाहते हैं कि धरातल पर हवा किस तरफ बह रही है।

कुशवाहा की बेचैनी और उम्मीद

उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति के ऐसे खिलाड़ी हैं जो कभी शांत नहीं बैठते। पिछले कुछ समय से वे अपनी खोई हुई सियासी जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटे हैं। उनके समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि वे अपनी बार्गेनिंग पावर बढ़ाना चाहते हैं।

क्या वे किसी बात से नाराज हैं? या फिर पार्टी विस्तार का प्लान है? वैसे तो इसे एक सामान्य "संगठन की बैठक" कहा जा रहा है, लेकिन बिहार में "चाय और बैठक" के मायने अक्सर गहरे होते हैं।

फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर हैं कि माधव आनंद और आलोक सिंह के साथ इस मंथन के बाद, उपेंद्र कुशवाहा का अगला बयान या कदम क्या होता है। क्या वे एनडीए में अपने लिए और बड़ी कुर्सी की मांग करेंगे? या फिर कुछ और खिचड़ी पक रही है? वक्त बताएगा, लेकिन हलचल तो है!