शारदीय नवरात्रि पर देवभूमि उत्तराखंड की इन चमत्कारिक और पावन देवी शक्तिपीठों के करें दर्शन

शारदीय नवरात्रि पर देवभूमि उत्तराखंड की इन चमत्कारिक और पावन देवी शक्तिपीठों के करें दर्शन

देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में देवी देवताओं का वास माना जाता है, और जब बात शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri 2026) के पावन पर्व की हो, तो इस हिमालयी राज्य की आभा और आध्यात्मिक ऊर्जा देखने लायक होती है। साल भर में आने वाली चारों नवरात्रियों में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है, जिसके दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिवत आराधना की जाती है। यदि आप भी इस नवरात्रि अपनी फैमिली या दोस्तों के साथ किसी शांत, पवित्र और चमत्कारी तीर्थ यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं, तो उत्तराखंड के इन प्राचीन देवी मंदिरों की यात्रा आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। पहाड़ों की गोद में बसे ये शक्तिपीठ और सिद्धपीठ केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने चमत्कारों और अटूट मान्यताओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। आइए जानते हैं कि इस शारदीय नवरात्रि पर आपको उत्तराखंड के किन-किन प्रमुख देवी मंदिरों के दर्शन करने के लिए जरूर जाना चाहिए।

Mansa Devi and Chandi Devi Temple Haridwar: हरिद्वार की पावन धरती पर स्थित मां मनसा और चंडी देवी के दर्शन से होती है हर मनोकामना पूरी

उत्तराखंड के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले पवित्र शहर हरिद्वार में शारदीय नवरात्रि के दिनों में जो भव्य और अलौकिक नजारा देखने को मिलता है, वह श्रद्धालुओं के मन को मोह लेता है। शिवालिक पहाड़ियों पर विराजमान मां मनसा देवी और मां चंडी देवी के मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध सिद्ध पीठों में गिने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि मां मनसा देवी अपने भक्तों के मन की हर मुराद को पूरा करती हैं, जबकि मां चंडी देवी राक्षसों का संहार करने वाली शक्तिशाली ममतामयी माता हैं। नवरात्रि के इन नौ दिनों में इन दोनों ही मंदिरों में देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर मां के दर्शन प्राप्त करते हैं। पहाड़ी की चोटी पर स्थित इन मंदिरों तक पहुँचने के लिए पैदल सीढ़ियों का रास्ता भी है और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आधुनिक रोप-वे (Ropeway) सेवा भी उपलब्ध है, जहाँ से नीचे बहती गंगा नदी और पूरे हरिद्वार शहर का विहंगम नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

Naina Devi Temple Nainital: नैनीताल की झील किनारे बसी मां नैना देवी का दरबार, जहाँ सती के नेत्र गिरने से हुई थी इस शक्तिपीठ की स्थापना

उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल नैनीताल की नैनी झील के उत्तरी किनारे पर स्थित मां नैना देवी का मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का मुख्य केंद्र है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ माता सती के नेत्र गिरे थे, जिसके कारण इस जगह को एक अत्यंत पवित्र शक्तिपीठ माना जाता है। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर इस मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से बेहद भव्य तरीके से सजाया जाता है, और झील के ठंडे पानी के बीच गूंजने वाले माता के भजन पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देते हैं। नैनी झील की शांत लहरों के बीच स्थित इस देवी दरबार में माथा टेकने आने वाले हर भक्त को मानसिक शांति और अटूट सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। नैनीताल की इस खूबसूरत वादियों के बीच नवरात्रि का यह आध्यात्मिक अनुभव किसी भी यात्री के लिए जीवन भर का एक अनमोल संस्मरण बन जाता है।

Dhari Devi Temple Srinagar Garhwal: अलकनंदा के तट पर स्थित जागृत शक्तिपीठ धारी देवी, दिन में तीन बार रूप बदलती हैं मां की यह चमत्कारी मूर्ति

गढ़वाल क्षेत्र में श्रीनगर से कुछ ही दूरी पर अलकनंदा नदी के पावन तट पर स्थित धारी देवी का मंदिर उत्तराखंड के सबसे रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिरों में शुमार किया जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ स्थापित माता काली का विग्रह दिन में तीन बार अपना रूप बदलता है—सुबह कन्या रूप, दोपहर में युवती रूप और शाम को वृद्ध रूप में दिखाई देता है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की इस देवी पर अटूट श्रद्धा है, और ऐसा माना जाता है कि धारी देवी इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करने वाली रक्षक हैं। नवरात्रि के दिनों में यहाँ विशेष अनुष्ठान और महाआरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर से तांत्रिक, साधक और सामान्य भक्त खींचे चले आते हैं। नदी के बीचोंबीच चट्टान पर बने इस मंदिर का परिवेश और प्राकृतिक सौंदर्य हर किसी को अचंभित कर देता है।

Kunjapuri Devi Temple Tehri: टिहरी गढ़वाल की पहाड़ियों पर स्थित माँ कुंजापुरी मंदिर, जहाँ से सूर्योदय और हिमालय के दर्शन का मिलता है अद्भुत नजारा

टिहरी गढ़वाल जिले में लगभग 1676 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माँ कुंजापुरी देवी का मंदिर उत्तराखंड के 52 शक्तिपीठों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्धपीठ माना जाता है। शारदीय नवरात्रि के दौरान इस मंदिर का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि यहाँ माता के दर्शन के साथ-साथ प्रकृति के सबसे विहंगम दृश्यों को निहारने का अवसर मिलता है। मंदिर के प्रांगण से सुबह के वक्त उगते हुए सूर्य (Sunrise) की किरणें जब हिमालय की बर्फीली चोटियों पर पड़ती हैं, तो वह नजारा किसी स्वर्ग से कम नहीं प्रतीत होता। नवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ रातभर जागरण, हवन और विशेष ज्योतिकश का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। सीढ़ियों से चढ़कर पहाड़ी की चोटी पर बने इस मंदिर तक पहुँचने की यह यात्रा थोड़ी कठिन जरूर होती है, लेकिन माता के दरबार में पहुँचकर मिलने वाली शांति इस सारी थकान को पलभर में दूर कर देती है।