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भारत की वो जादुई जगह जहां लहरों पर तैरते हैं घर और बाजार, खूबसूरती देखकर भूल जाएंगे विदेशों के हिल स्टेशन

दुनियाभर में घूमने-फिरने और प्रकृति की खूबसूरती को निहारने के शौकीन लोग अक्सर वेनिस या यूरोप के सुंदर शहरों की बातें करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे अपने देश भारत में ही एक ऐसी अद्भुत और चमत्कारी जगह मौजूद है, जहां का पूरा जनजीवन ही पानी पर टिका हुआ है? जी हां, इस अनोखी जगह पर लोगों के पक्के मकान, राशन की दुकानें, स्कूल और पूरा का पूरा बाजार पानी की लहरों के ऊपर तैरता (Floating World) हुआ नजर आता है। क्रेडिबल एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन के मानकों के अनुसार, प्रकृति के इस बेजोड़ और अनोखे नजारे के सामने दुनिया के बाकी सभी ट्रैवल डेस्टिनेशन पूरी तरह फीके पड़ जाते हैं। इस मानसून और वेकेशन सीजन में यह जादुई जगह पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

पूर्वोत्तर भारत का वो अनोखा रत्न जहां कुदरत ने बिखेरा है अपना असली जादू

प्रकृति के इस तैरते हुए अजूबे का नाम है 'लोकतक झील' (Loktak Lake), जो भारत के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में स्थित है। लोकतक झील को दुनिया की एकमात्र ऐसी झील माना जाता है जिसके ऊपर 'फुमदी' (Phumdis) तैरती हैं। फुमदी असल में मिट्टी, जैविक पदार्थों और वनस्पतियों के संचय से बनी एक ठोस परत होती है, जो देखने में बिल्कुल छोटे-छोटे हरे टापुओं जैसी लगती है। इन्हीं तैरते हुए प्राकृतिक द्वीपों के ऊपर यहां की स्थानीय आबादी ने अपने सुंदर घर बनाए हुए हैं, जिन्हें 'फुमशोंग' कहा जाता है। दिल्ली, मुंबई, प्रयागराज और कोलकाता जैसे महानगरों की भीड़भाड़ से दूर यहां आकर ऐसा लगता है मानो आप किसी दूसरी ही काल्पनिक दुनिया में कदम रख चुके हैं।

पानी पर सजता है अनोखा बाजार, नावों के सहारे चलती है पूरी जिंदगी

लोकतक झील के इस तैरते संसार की सबसे खूबसूरत बात यहां का अनोखा फ्लोटिंग मार्केट (Floating Market) है। सुबह होते ही स्थानीय मछुआरे और दुकानदार अपनी छोटी-छोटी पारंपरिक नावों में ताजी सब्जियां, फल, घरेलू सामान और मछलियां लेकर झील के बीचो-बीच पहुंच जाते हैं। यहां सारा लेन-देन और व्यापार पानी के ऊपर ही तैरती हुई नावों के माध्यम से होता है। इतना ही नहीं, बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां पानी पर तैरता हुआ एक प्राथमिक स्कूल भी मौजूद है। स्थानीय ज्योग्राफिकल और कल्चरल एक्सपर्ट्स के अनुसार, सदियों से चली आ रही यह जीवनशैली पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है और यहां के लोग प्रकृति के साथ बेहतरीन सामंजस्य बनाकर रहते हैं।

दुनिया का इकलौता तैरता हुआ नेशनल पार्क भी है इसी जगह का हिस्सा

इस अनोखी झील के भीतर ही दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान यानी 'केबुल लामजाओ नेशनल पार्क' (Keibul Lamjaao National Park) भी स्थित है। यह नेशनल पार्क बेहद दुर्लभ और विलुप्तप्राय 'संगाई हिरण' (Sangai Deer) का आखिरी प्राकृतिक निवास स्थान है। इस हिरण को 'डांसिंग डियर' भी कहा जाता है, क्योंकि जब यह तैरती हुई फुमदी पर चलता है, तो इसके संतुलन बनाने का अंदाज किसी नृत्य जैसा प्रतीत होता है। इंफाल हवाई अड्डे से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जन्नत तक पहुंचना बेहद आसान है। अगर आप भी किसी ऐसे सफर पर जाना चाहते हैं जो आपके जीवन का सबसे यादगार अनुभव बन जाए, तो मणिपुर की इस अनोखी लोकतक झील का दीदार जरूर करें।

 

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