दीवाली 2026: उत्तर प्रदेश के इन ऐतिहासिक शहरों में बेहद खास होता है रोशनी का पर्व

दीवाली 2026: उत्तर प्रदेश के इन ऐतिहासिक शहरों में बेहद खास होता है रोशनी का पर्व

रोशनी, उमंग और आस्था का महापर्व दीपावली भारत में बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। जब बात इस पावन पर्व की सांस्कृतिक भव्यता और त्रेतायुग की यादों को ताजा करने की हो, तो उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। उत्तर प्रदेश में दीपावली का जश्न केवल घरों में दीये जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के कई शहर अपनी अनूठी परंपराओं, भव्य आयोजनों और ऐतिहासिक महत्व के कारण पूरी दुनिया में अपनी एक खास पहचान रखते हैं। प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या से लेकर मां गंगा की गोद में बसे आध्यात्मिक शहर वाराणसी और ब्रज की सांस्कृतिक धरा तक, यूपी के कई शहर ऐसे हैं जहां दीपोत्सव का नजारा देखने लायक होता है। यदि आप भी इस दीवाली या आगामी पर्यटक सीजन में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक खूबसूरती और उत्सव के रंगों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो राज्य के इन चुनिंदा शहरों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए, जो आपके सफर को हमेशा के लिए यादगार बना देंगे।

#1. अयोध्या: भव्य दीपोत्सव और सरयू तट पर लाखों दीपों की अलौकिक छटा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) शहर के बिना दीपावली की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भगवान श्री राम की जन्मस्थली होने के नाते अयोध्या में हर साल दीवाली का पर्व एक ऐतिहासिक और वैश्विक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। हाल के वर्षों में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद से यहां का दीपोत्सव और अधिक भव्य हो चुका है। सरयू नदी के तट पर स्थित राम की पैड़ी और विभिन्न घाटों पर लाखों की संख्या में मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं, जिससे पूरी रात नदी का तट किसी सोने की तरह चमकने लगता है। लेजर शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और पारंपरिक रामलीलाओं का मंचन इस शहर के माहौल को पूरी तरह से आध्यात्मिक और राममय बना देता है। यदि आप दीवाली के असली और पौराणिक स्वरूप को देखना चाहते हैं, तो अयोध्या की यात्रा करना आपके लिए सबसे बेहतरीन अनुभव साबित होगा।

#1. वाराणसी: मोक्ष की नगरी काशी में अलौकिक दीपोत्सव और गंगा घाटों का नजारा

धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की प्राचीन राजधानी वाराणसी (Varanasi) में दीवाली का जश्न एक अलग ही स्तर पर होता है। गंगा के अर्धचंद्राकार घाटों पर जब हजारों-लाखों दीये जलाए जाते हैं और भव्य गंगा आरती का आयोजन होता है, तो उस दृश्य को देखकर आंखें चौंधिया जाती हैं। हालांकि दीवाली के मुख्य दिन के अलावा यहां की देव दीपावली (जो दीवाली के लगभग पखवाड़े भर बाद आती है) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जिसमें घाटों की सीढ़ियों पर अनगिनत दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। संकीर्ण गलियों से लेकर प्राचीन मंदिरों तक, पूरी काशी रोशनी से नहाई नजर आती है। नाव की सवारी करते हुए गंगा के घाटों पर जगमगाते दीपों को देखना पर्यटकों के लिए एक बेहद सम्मोहक और शांतिदायक अनुभव होता है।

#1. मथुरा और वृंदावन: भगवान कृष्ण की नगरी में ब्रज की अनोखी और पारंपरिक दीवाली

ब्रज भूमि यानी मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन का क्षेत्र अपनी अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। दीवाली के पावन अवसर पर बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर और तमाम प्रमुख मंदिरों को बेहद भव्य तरीके से सजाया जाता है। यहां दीवाली से पहले ही अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के विशेष उत्सव शुरू हो जाते हैं, जिनमें शामिल होने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ब्रज की गलियों में गूंजते भजन, पारंपरिक रासलीला और मंदिरों में होने वाली विशेष सजावट पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। अगर आप आधुनिक चकाचौंध से दूर भगवान कृष्ण की भक्ति और पारंपरिक उल्लास से सराबोर दीवाली देखना चाहते हैं, तो मथुरा-वृंदावन का रुख जरूर करें।

#1. गोरखपुर और प्रयागराज: संगम तट और गोरक्षपीठ पर दीवाली की अनूठी रौनक

पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख केंद्र गोरखपुर और संगम नगरी प्रयागराज भी दीवाली के जश्न के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में दीवाली का पर्व बेहद पारंपरिक और अनुष्ठानिक तरीके से मनाया जाता है, जहां गोरक्षपीिशठ की अपनी एक अलग सांस्कृतिक गरिमा है। वहीं दूसरी ओर, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम के तट पर और कुंभ मेला क्षेत्रों में दीये जलाकर भव्य तरीके से दीपोत्सव मनाया जाता है। इन शहरों के स्थानीय बाजारों में पारंपरिक मिठाइयों, दीयों और आतिशबाजी की जो रौनक देखने को मिलती है, वह उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति का वास्तविक चेहरा सामने रखती है।