पलामू में फिर शुरू होगी कोयल नदी में बोटिंग, भीम चूल्हा बनेगा आकर्षण
झारखंड के खूबसूरत पलामू जिले से पर्यटन प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और उत्साहवर्धक खबर सामने आ रही है। पलामू के ऐतिहासिक, पौराणिक और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने एक बार फिर से कोयल नदी की लहरों पर बोटिंग (नौका विहार) सेवा शुरू करने की मुकम्मल तैयारी कर ली है। इसके साथ ही इस क्षेत्र के सबसे बड़े आकर्षण केंद्र यानी लगभग 170 टन वजनी रहस्यमयी और ऐतिहासिक 'भीम चूल्हा' के दीदार करने के लिए आने वाले पर्यटकों को इस बार एक नया और दोगुना रोमांच मिलने वाला है। प्रशासनिक पहलों के बाद से पलामू के इस प्रमुख पिकनिक स्पॉट पर सैलानियों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय पर्यटन कारोबार को भी पंख लगेंगे।
कोयल नदी में बोटिंग की वापसी: पिकनिक स्पॉट्स पर गूंजेगी पर्यटकों की किलकारियां
पलामू की जीवनदायिनी कहे जाने वाली कोयल नदी के तटों पर एक बार फिर से वाटर एडवेंचर और बोटिंग का लुत्फ उठाया जा सकेगा। सुरक्षा मानकों को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने नदी के चुनिंदा हिस्सों में आधुनिक लाइफ जैकेट और मोटरबोट की व्यवस्था सुनिश्चित की है। सर्दियों का मौसम शुरू होते ही पलामू और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने के लिए कोयल नदी के किनारों पर पहुंचते हैं। ऐसे में नदी में दोबारा बोटिंग शुरू होने से पर्यटकों को प्रकृति के बीच सैर करने और जलक्रीड़ा का आनंद लेने का बेहतरीन अवसर प्राप्त होगा। स्थानीय युवा गाइड और नौका चालकों में भी इस निर्णय के बाद भारी उत्साह देखा जा रहा है।
170 टन वजनी ऐतिहासिक 'भीम चूल्हा' बना पलामू का सबसे बड़ा रहस्यमयी और दार्शनिक आकर्षण
कोयल नदी के तट और उससे सटे पहाड़ी इलाकों में स्थित लगभग 170 टन वजनी ऐतिहासिक 'भीम चूल्हा' पलामू की प्राचीन सांस्कृतिक और पौराणिक धरोहर का एक जीवंत प्रतीक है। महाकाव्य महाभारत काल से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां प्रवास किया था और भीम द्वारा भोजन पकाने के लिए इस विशालकाय पत्थर की संरचना का उपयोग किया गया था। इतने भारी-भरकम पत्थर के वजन और इसकी अनूठी बनावट को देखने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से इतिहासकार, पुरातत्व प्रेमी और सैलानी यहां पहुंचते हैं। अब इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास टूरिस्ट फ्रेंडली पाथवे और सिटिंग अरेंजमेंट विकसित किए जा रहे हैं, जिससे पर्यटक बिना किसी परेशानी के इस अद्भुत नज़ारे का आनंद ले सकें।
स्थानीय पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा, जिला प्रशासन की विशेष पहल
पलामू जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन सर्किट को विकसित करने की इस कड़ी में कोयल नदी और भीम चूल्हा क्षेत्र को एक प्रमुख इको-टूरिज्म हब के रूप में तब्दील किया जा रहा है। यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के लिए पुलिस पिकेट, चेंजिंग रूम, पेयजल और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। पर्यटन के विकास से स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों, ट्रांसपोर्टर्स और गाइडों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। प्रशासन का यह भी प्रयास है कि पलामू की इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पटल पर एक बेहतरीन वीकेंड गेटवे और पिकनिक डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित किया जाए।
सर्दियों के सीजन में पलामू घूमने का सबसे सही समय: प्रकृति प्रेमियों के लिए वरदान
नवंबर से लेकर फरवरी तक का यह समय पलामू के जंगलों, नदियों और ऐतिहासिक स्थलों की सैर करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। गुनगुनी धूप, ठंडी हवा के झोंके और कोयल नदी के कल-कल बहते पानी के बीच पिकनिक मनाने का अनुभव बेहद सुकून भरा होता है। यदि आप भी इस वीकेंड या आगामी छुट्टियों में किसी शांत, ऐतिहासिक और रोमांचक जगह पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो पलामू का यह क्षेत्र आपके लिए एकदम परफेक्ट साबित होगा। बोटिंग के रोमांच और 170 टन के भीम चूल्हा के ऐतिहासिक रहस्यों को नजदीक से देखने का अवसर हाथ से न जाने दें।