राष्ट्रपति मुर्मू से नहीं मिल पाएंगे TMC सांसद? राष्ट्रपति भवन ने ठुकराई मुलाकात की मांग जानें क्या है विवाद की असल वजह
News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा 'प्रोटोकॉल विवाद' अब दिल्ली तक पहुँच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों और मंत्रियों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलकर उन्हें राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना चाहता था। हालांकि, राष्ट्रपति भवन ने इस अनुरोध को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है, जिससे टीएमसी और केंद्र के बीच जारी जुबानी जंग और तेज हो गई है।
क्यों ठुकराया गया मुलाकात का अनुरोध?
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति सचिवालय ने टीएमसी के 12 से 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात न करने के पीछे 'समय की कमी' (Paucity of Time) का हवाला दिया है।
टीएमसी का पक्ष: पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने 9 मार्च को पत्र लिखकर इस सप्ताह का समय माँगा था। टीएमसी सांसद सौगत राय ने शुक्रवार (13 मार्च 2026) को संसद के बाहर कहा, "हम राष्ट्रपति को आदिवासियों के कल्याण के लिए बंगाल सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में स्पष्टीकरण देना चाहते थे, लेकिन हमें समय नहीं दिया जा रहा है।"
अगली कोशिश: मुलाकात का अनुरोध ठुकराए जाने के बाद, टीएमसी ने फिर से राष्ट्रपति कार्यालय को पत्र लिखकर अगले सप्ताह का समय माँगा है।
विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?
इस टकराव की शुरुआत पिछले शनिवार (7 मार्च 2026) को राष्ट्रपति मुर्मू की पश्चिम बंगाल यात्रा के दौरान हुई थी:
हवाई अड्डे पर अनुपस्थिति: राष्ट्रपति ने इस बात पर नाराजगी जताई थी कि जब वे बागडोगरा हवाई अड्डे पहुँचीं, तो उनके स्वागत के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद थीं और न ही राज्य कैबिनेट का कोई मंत्री।
प्रोटोकॉल का उल्लंघन: बीजेपी ने इसे राष्ट्रपति का 'घोर अपमान' और 'ब्लू बुक' (प्रोटोकॉल नियमावली) का उल्लंघन बताया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस घटना को "शर्मनाक और अभूतपूर्व" करार दिया है।
टीएमसी का जवाब: ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि वह उस समय कोलकाता में एक धरने पर थीं और वह कार्यक्रम एक निजी संस्था द्वारा आयोजित था, न कि राज्य सरकार द्वारा। टीएमसी ने बीजेपी के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।
सियासी बयानबाजी और आरोप
महुआ मोइत्रा (TMC): टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति "बीजेपी के शब्दों को दोहरा (parroting) रही हैं" और बंगाल सरकार पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
जेपी नड्डा (BJP): बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि एक महिला मुख्यमंत्री द्वारा देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
कल्याण बनर्जी (TMC): उन्होंने सवाल उठाया कि अगर राष्ट्रपति को कोई शिकायत थी, तो वे सीधे मुख्यमंत्री (अपनी 'बहन') को फोन कर सकती थीं, इसे सार्वजनिक मुद्दा क्यों बनाया गया?