1 लाख रुपये महीना कमाने वाले सावधान! अब जेब में नहीं, PF में जाएगा ज्यादा पैसा
महीने की आखिरी तारीख का हम सब बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि उस दिन मोबाइल पर 'सैलरी क्रेडिट' का मैसेज आता है। लेकिन अब आपको उस मैसेज में दिखने वाली रकम थोड़ी कम लग सकती है। घबराइए नहीं, आपकी सैलरी घटी नहीं है, बस सरकार के नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) के लागू होने से सैलरी का गणित थोड़ा बदल गया है।
इसका असर आपकी जेब, कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट और बैलेंस शीट—सब पर पड़ने वाला है। अगर आपकी बेसिक सैलरी (Basic Pay) कुल पैकेज (CTC) के आधे से कम है, तो यह खबर खास आपके लिए है।
पुराना खेल खत्म, अब नया नियम शुरू
सालों से प्राइवेट कंपनियों में सैलरी स्ट्रक्चर का एक फिक्स फॉर्मूला चलता आ रहा था। कंपनियां जानबूझकर कर्मचारियों की 'बेसिक सैलरी' कम रखती थीं (अक्सर कुल पैकेज का 25% से 40% तक)। बाकी पैसा 'अलाउंस' (भत्ते) के नाम पर दिया जाता था। इसका फायदा यह होता था कि पीएफ (PF) कम कटता था और कर्मचारी के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा नकदी (Take Home Salary) आती थी।
लेकिन नए लेबर कोड ने इस पुरानी व्यवस्था पर रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि अब आपकी 'बेसिक सैलरी' आपकी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होनी ही चाहिए।
आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?
इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं। जैसे ही आपकी बेसिक सैलरी बढ़ेगी, वैसे ही आपका पीएफ (Provident Fund) का हिस्सा भी बढ़ जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि पीएफ हमेशा बेसिक सैलरी पर कटता है। साथ ही, आपकी ग्रेच्युटी (Gratuity) भी बढ़ जाएगी।
इसका मतलब है-फायदा और नुकसान दोनों।
- नुकसान: हर महीने आपके बैंक खाते में आने वाला पैसा (Cash in Hand) थोड़ा कम हो जाएगा।
- फायदा: आपका पीएफ फंड मोटा हो जाएगा और रिटायरमेंट पर आपको ज्यादा पैसा मिलेगा। ग्रेच्युटी की रकम भी बढ़कर मिलेगी। यानी "आज थोड़ी कड़की, लेकिन कल का भविष्य सुरक्षित।"
उदाहरण से समझिए अपना नुकसान-फायदा
मान लीजिए, आपका कुल पैकेज (CTC) 1 लाख रुपये महीना है।
पुराना सिस्टम:
अभी तक अगर आपकी बेसिक सैलरी 30,000 रुपये थी, तो पीएफ 12% के हिसाब से करीब 3,600 रुपये कटता था। बाकी 70,000 रुपये अलाउंस के रूप में मिलते थे।
नया सिस्टम:
नए नियम के मुताबिक, 1 लाख की सीटीसी में बेसिक सैलरी कम से कम 50% यानी 50,000 रुपये करनी पड़ेगी। अब पीएफ 50,000 का 12% यानी 6,000 रुपये कटेगा।
नतीजा: पहले आपकी सैलरी से 3,600 कटते थे, अब 6,000 कटेंगे। यानी सीधे तौर पर आपकी टेक-होम सैलरी 2,400 रुपये कम हो जाएगी।
विशेषज्ञ, जैसे कि Gi Group Holding के डायरेक्टर कुलजीत सिंह, मानते हैं कि इससे कंपनियों का खर्चा बढ़ेगा और कर्मचारियों की मंथली इनकम कम होगी, लेकिन लंबी अवधि (Long Term) में यह कर्मचारियों के हित में ही है। यह जबरदस्ती की बचत जैसा है जो आपको नौकरी छोड़ते वक्त या रिटायरमेंट पर खुशी देगी।