यह सिर्फ एक एक्सीडेंट नहीं, एक पुनर्जन्म है, ऋषभ पंत ने खोला अपनी वापसी के पीछे का सबसे बड़ा राज

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News India Live, Digital Desk : दिसंबर 2022 की वह सर्द और काली रात भारतीय क्रिकेट का शायद ही कोई फैन उस दिन को भूल सकता है। उस रात हमने अपने सबसे जांबाज और विस्फोटक क्रिकेटर, ऋषभ पंत (Rishabh Pant) को एक भयानक कार हादसे में लगभग खो ही दिया था। उस एक्सीडेंट के बाद से आज तक, करोड़ों लोग बस एक ही दुआ कर रहे थे - हमारा पंत बस ठीक हो जाए, फिर से मैदान पर दिख जाए।

अब, लगभग दो साल के लंबे, दर्दनाक और बेहद चुनौतीपूर्ण इंतजार के बाद, ऋषभ पंत न केवल ठीक हो चुके हैं, बल्कि मैदान पर वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन यह वापसी उतनी आसान नहीं थी। इसके पीछे एक ऐसी कहानी है जिसमें दर्द है, आंसू हैं, डर है और हार न मानने वाला फौलादी जज्बा है। पंत ने पहली बार अपनी उस रिकवरी के दौर के बारे में खुलकर बात की है, जिसे सुनकर किसी की भी रूह कांप जाए।

"फ्रैक्चर नहीं, पूरा पैर ही..."

ऋषभ पंत ने हाल ही में खुलासा किया है कि उनकी चोट सिर्फ एक मामूली फ्रैक्चर नहीं थी, जैसा कि ज्यादातर लोग समझ रहे थे। उनके पैर की हड्डी (specifically the navicular bone) अपनी जगह से पूरी तरह हट (dislocate) गई थी और टूट (fracture) भी गई थी। यह एक बहुत ही दुर्लभ और गंभीर चोट है।

अपने उस मुश्किल दौर को याद करते हुए पंत ने कहा, "शुरुआत में, यह बेहद चुनौतीपूर्ण था... मुझे अपने पैर की उस चोट से उबरने में बहुत समय लगा। ईमानदारी से कहूं तो, यह एक साधारण फ्रैक्चर नहीं था, यह पूरी तरह से अपनी जगह से हट गया था और टूट भी गया था।"

जब सताने लगा था डर...

पंत ने उस डर का भी जिक्र किया जो रिकवरी के दौरान हर पल उन्हें सताता था। उन्होंने कहा, "जब आप इतने लंबे समय तक बिस्तर पर होते हैं, तो आपके दिमाग में नकारात्मक विचार आने लगते हैं। आप सोचने लगते हैं कि क्या मैं कभी दोबारा चल भी पाऊंगा? क्या मैं फिर से क्रिकेट खेल पाऊंगा?"

उन्होंने बताया, "मेरी रिकवरी का सफर बहुत धीमा था। हर दिन एक नई चुनौती जैसा लगता था। लेकिन मैंने खुद से एक ही बात कही - मुझे हार नहीं माननी है।"

वापसी के लिए अब हैं पूरी तरह तैयार

इन सभी चुनौतियों को पार करने के बाद, पंत अब शारीरिक और मानसिक, दोनों रूप से पहले से कहीं ज्यादा मजबूत महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अब मैं मैदान पर वापस आने के लिए पहले से कहीं ज्यादा उत्साहित हूं। मुझे लगता है कि इस ब्रेक ने मुझे एक क्रिकेटर और एक इंसान के तौर पर बहुत कुछ सिखाया है।"

ऋषभ पंत का यह सफर सिर्फ एक क्रिकेटर की वापसी की कहानी नहीं है। यह इंसान के हौसले, दृढ़ संकल्प और हार न मानने की जिद की एक अविश्वसनीय मिसाल है। यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर आपके इरादों में जान हो, तो आप मौत के मुंह से भी अपनी जिंदगी और अपने सपनों को वापस छीनकर ला सकते हैं। पूरा देश अब अपने इस 'योद्धा' को एक बार फिर से मैदान पर चौके-छक्के लगाते देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।