इस गुरु पर्व आपका घर भी बनेगा गुरुद्वारा जानें घर पर पाठ और कीर्तन कराने की सबसे सरल विधि

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News India Live, Digital Desk: गुरु नानक जयंती का दिन सिख समुदाय के लिए सबसे बड़े उत्सवों में से एक होता है. इस दिन गुरुद्वारों में रौनक देखते ही बनती है - शबद-कीर्तन की गूंज और "वाहेगुरु-वाहेगुरु" के जाप से माहौल भक्ति और शांति से भर जाता है. कई लोग इस पवित्र दिन पर अपने घर में भी सुख-शांति और गुरु की कृपा पाने के लिए पाठ और कीर्तन का आयोजन करते हैं.

अगर आप भी इस गुरु पर्व पर अपने घर को गुरु की बाणी से पवित्र करना चाहते हैं, तो यह कोई मुश्किल काम नहीं है. आप कुछ सरल बातों का ध्यान रखकर घर पर ही गुरुद्वारे जैसा पवित्र माहौल बना सकते हैं.

1. सबसे पहले घर की साफ़-सफाई करें

किसी भी धार्मिक आयोजन की पहली और सबसे ज़रूरी शर्त है - पवित्रता. इसलिए, पाठ और कीर्तन की तैयारी घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई के साथ शुरू करें. माना जाता है कि साफ़-सुथरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. जिस कमरे में आपको श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश करना है, उस जगह को বিশেষভাবে साफ़ करें.

2. एक पवित्र स्थान तैयार करें

घर के सबसे साफ़ और शांत कमरे में एक ऊंचा स्थान (जैसे कोई मेज या चौकी) चुनें. उस पर साफ़-सुथरे और सुंदर वस्त्र बिछाएं. इस स्थान को फूलों से सजाएं. यह वही जगह है जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सम्मानपूर्वक स्थापित किया जाएगा.

3. गुरु ग्रंथ साहिब जी को घर लाएं

अगर आप अखंड पाठ या सहज पाठ करवाना चाहते हैं, तो आपको पूरे सम्मान के साथ गुरुद्वारे से गुरु ग्रंथ साहिब जी को घर लाना होता है. इस दौरान 'सर पर' गुरु ग्रंथ साहिब जी को लाया जाता है और आगे-आगे कोई एक व्यक्ति पानी का छिड़काव करते हुए रास्ता साफ़ करता है. यह प्रक्रिया पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ की जानी चाहिए.

4. पाठ और कीर्तन का आयोजन

अब आप पाठ शुरू कर सकते हैं. आप अपनी श्रद्धानुसार 'अखंड पाठ' (जो 48 घंटे लगातार चलता है) या 'सहज पाठ' (जिसे कुछ दिनों या हफ्तों में पूरा किया जाता है) रखवा सकते हैं. इसके साथ ही, कीर्तन के लिए आप किसी रागी जत्थे को बुला सकते हैं, जो अपनी मधुर वाणी में शबद-कीर्तन गाकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना देते हैं. आप परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर भी कीर्तन कर सकते हैं.

5. अरदास और कड़ाह प्रसाद

पाठ और कीर्तन के समापन पर 'अरदास' की जाती है. इसमें ईश्वर को धन्यवाद दिया जाता है और पूरी दुनिया की भलाई के लिए प्रार्थना की जाती है. अरदास के बाद, 'कड़ाह प्रसाद' बांटा जाता है, जिसे बहुत ही पवित्र माना जाता है. यह प्रसाद आटे, घी और चीनी से बनता है और इसे पूरी स्वच्छता और भक्ति-भाव से तैयार किया जाता है.

याद रखें, किसी भी पूजा या पाठ में भव्यता से ज़्यादा ज़रूरी आपकी श्रद्धा और साफ मन होता है. अगर आप इन सरल तरीकों से घर पर गुरु नानक जयंती मनाते हैं, तो यकीन मानिए, आपके घर में भी सुख-शांति और समृद्धि का वास होगा.