किडनी और लिवर की बीमारियों का कुदरती समाधान? सहदेवी पौधे के ये फायदे कर देंगे आपको हैरान
News India Live, Digital Desk: क्या आपने कभी गौर किया है कि हमारे घर के आँगन, बाग-बगीचे या यहाँ तक कि सड़क के किनारे अक्सर कुछ ऐसे छोटे-छोटे पौधे उग आते हैं जिन्हें हम 'जंगली घास' या 'खरपतवार' समझकर हटा देते हैं? लेकिन हमारे पूर्वजों और आयुर्वेद के पास इन मामूली दिखने वाले पौधों के लिए एक अलग ही नज़रिया था। ऐसा ही एक करिश्माई पौधा है सहदेवी (Sahadevi)।
इसका नाम जितना सुंदर है, इसके काम भी उतने ही कमाल के हैं। बैगनी या गुलाबी रंग के नन्हे फूलों वाला यह पौधा जिसे हम फालतू समझते हैं, वो असल में आपकी किडनी और लिवर की सुरक्षा के लिए कुदरत का एक अनमोल रक्षा-कवच है। चलिए आज थोड़ा करीब से जानते हैं कि यह हमारे शरीर के लिए कैसे काम करता है।
किडनी के लिए एक बेहतरीन 'फिल्टर'
हमारी किडनी दिन-रात खून साफ करने का काम करती है। आजकल के खान-पान और प्रदूषण की वजह से किडनी पर दबाव बढ़ जाता है। आयुर्वेद में सहदेवी को एक उत्तम 'डायूरेटिक' (मूत्रवर्धक) माना गया है। इसका मतलब ये है कि यह पेशाब की मात्रा बढ़ाकर किडनी में जमा टॉक्सिन्स यानी गन्दगी को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। यहाँ तक कि अगर किसी को शुरुआती स्तर पर किडनी स्टोन (पथरी) की समस्या है, तो यह उसे गलाने में भी सहायक साबित हो सकता है।
लिवर को नई ज़िंदगी देने की ताक़त
लिवर हमारे शरीर की 'केमिकल फैक्ट्री' है। ज्यादा तला-भुना खाना या दवाइयों के सेवन से लिवर पर बुरा असर पड़ता है। सहदेवी के पत्तों और जड़ में कुछ ऐसे औषधीय तत्व पाए जाते हैं जो लिवर की कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान करते हैं। यह लिवर को डिटॉक्स (विषहरण) करता है और शरीर की पाचन प्रक्रिया को भी सुधारता है।
सिर्फ इतना ही नहीं... इसके और भी गुण हैं
सहदेवी सिर्फ लिवर-किडनी तक ही सीमित नहीं है। पुराने समय में जब बुखार या जोड़ों का दर्द नहीं जाता था, तब हकीम या वैद्य इसकी चाय (काढ़ा) की सलाह देते थे। इसके अलावा, त्वचा संबंधी रोग या घाव भरने के लिए भी इसकी पत्तियों का पेस्ट बहुत कारगर माना जाता है। यहाँ तक कि नींद न आने की समस्या (Insomnia) में भी सहदेवी की जड़ का आयुर्वेद में विशेष महत्व बताया गया है।
इस्तेमाल करते समय सावधानी
कुदरती चीज़ें सेहत के लिए बहुत अच्छी होती हैं, लेकिन उनकी खुराक और सही जानकारी होना भी उतना ही ज़रूरी है। सहदेवी का काढ़ा या जूस लेने से पहले हमेशा किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ (Vaidya) की सलाह ज़रूर लें, क्योंकि हर किसी की शरीर की प्रकृति अलग होती है।
सहदेवी यह बताने के लिए काफी है कि 'खज़ाना' खोजने के लिए हमें हमेशा पहाड़ों पर जाने की ज़रूरत नहीं है, कभी-कभी वो हमारे पैरों के नीचे ज़मीन पर ही मिल जाता है। अगली बार जब आप अपने आस-पास इन बैगनी फूलों को देखें, तो इन्हें 'कचरा' न समझकर सम्मान ज़रूर दीजियेगा।