जयपुर SMS अस्पताल में मची चीख-पुकार ,छठी मंजिल से मरीज ने लगा दी छलांग
News India Live, Digital Desk : हम अक्सर कहते हैं कि अस्पताल वह जगह है जहाँ लोग नया जीवन पाने की उम्मीद में आते हैं। लोग सालों का मर्ज लेकर डॉक्टर के पास पहुँचते हैं ताकि फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सकें। लेकिन आज (8 जनवरी 2026) जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल की सुपर स्पेशलिटी बिल्डिंग से जो खबर आई, उसने न सिर्फ वहां मौजूद लोगों के होश उड़ा दिए, बल्कि पूरे प्रदेश को गमगीन कर दिया।
एसएमएस अस्पताल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जहाँ चौबीसों घंटे इलाज की आपाधापी रहती है, वहां एक मरीज ने छठी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जान दे दी। यह घटना सुनकर ही कलेजा मुंह को आता है।
अचानक हुआ सब कुछ और फैल गया सन्नाटा
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह सब इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला। मरीज अस्पताल की छठी मंजिल पर स्थित वार्ड में भर्ती था। कुछ ही मिनटों पहले तक सब सामान्य लग रहा था, लेकिन तभी वह खिड़की या बालकनी की तरफ गया और वहां से सीधे नीचे छलांग लगा दी। जैसे ही मरीज फर्श पर गिरा, अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। सुरक्षा गार्ड और डॉक्टर तुरंत दौड़े, लेकिन ऊँचाई इतनी ज्यादा थी कि उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
वजह जो रूह कपा दे?
अब सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर एक बीमार व्यक्ति ने ऐसा कदम क्यों उठाया? क्या वह अपनी बीमारी से बुरी तरह थक चुका था? या फिर कोई ऐसी मानसिक उलझन थी जो उस पर बीमारी से भी भारी पड़ गई? अक्सर लंबी बीमारियों और शारीरिक पीड़ा की वजह से लोग गहरे अवसाद (Depression) में चले जाते हैं। हालाँकि, पुलिस और अस्पताल प्रशासन इस मामले की तहकीकात कर रहे हैं, लेकिन जो परिवार आज अपने सदस्य को ठीक कराकर घर ले जाने का सपना देख रहा था, उस पर क्या बीत रही होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है।
अस्पतालों की सुरक्षा पर उठते सवाल
इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई हैं। समय-समय पर बड़े अस्पतालों से ऐसी दुखद खबरें आती रहती हैं। यह घटना फिर से याद दिलाती है कि सुपर स्पेशलिटी और बड़ी-बड़ी बिल्डिंगों के ऊंचे वार्डों में क्या मरीजों की सुरक्षा के लिए ग्रिल या जाली का इंतज़ाम पर्याप्त है? साथ ही, क्या हमें मरीजों के शारीरिक इलाज के साथ-साथ उनकी मानसिक स्थिति पर भी गौर नहीं करना चाहिए?
एक अपील:
हम समझ सकते हैं कि किसी बड़ी बीमारी से लड़ना बहुत कठिन होता है। अगर आपके आसपास भी कोई ऐसा व्यक्ति है जो लंबी बीमारी की वजह से शांत या गुमसुम रहने लगा है, तो उससे बात करें, उसका हाथ थामें। कई बार सिर्फ़ दवाइयां ही नहीं, बल्कि 'अपनत्व की दो बातें' भी किसी को जीने की नई वजह दे देती हैं।