कांग्रेस में अब कोई हिंदू नेता नहीं बचा ,रिपुन बोरा के इस्तीफे पर हिमंता बिस्वा सरमा का तीखा तंज

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News India Live, Digital Desk: असम की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रिपुन बोरा (Ripun Bora) के इस्तीफे के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर अब तक का सबसे बड़ा और विवादित हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि रिपुन बोरा के जाने के साथ ही कांग्रेस से 'आखिरी हिंदू चेहरा' भी खत्म हो गया है।

हिमंता का तंज: "कांग्रेस में अब केवल एक खास वर्ग"

रिपुन बोरा के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस अब असम में अपनी मूल पहचान खो चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "रिपुन बोरा कांग्रेस के आखिरी प्रमुख हिंदू नेता थे। उनके जाने के बाद अब असम कांग्रेस में केवल वही लोग बचे हैं जो एक विशेष वोट बैंक की राजनीति करते हैं।" मुख्यमंत्री का यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस के भीतर बढ़ते ध्रुवीकरण और सांगठनिक कमजोरी की ओर इशारा करता है।

रिपुन बोरा ने क्यों छोड़ी कांग्रेस?

असम कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे रिपुन बोरा ने पार्टी आलाकमान को अपना इस्तीफा सौंपते हुए गंभीर आरोप लगाए। उनके इस्तीफे के पीछे मुख्य कारण ये बताए जा रहे हैं:

पार्टी के भीतर गुटबाजी: बोरा ने आरोप लगाया कि असम कांग्रेस के कई नेता पार्टी की मजबूती के बजाय व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

नेतृत्व पर सवाल: उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझने में विफल रही है।

भविष्य की रणनीति: चर्चा है कि रिपुन बोरा अपनी पुरानी पार्टी (TMC) में वापस लौट सकते हैं या किसी नए विकल्प पर विचार कर रहे हैं।

असम की राजनीति पर क्या होगा असर?

असम में विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक बिसात को देखते हुए यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। रिपुन बोरा जैसे अनुभवी नेता का साथ छोड़ना पार्टी के कैडर को कमजोर कर सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ बोरा का व्यक्तिगत प्रभाव रहा है।

दूसरी ओर, भाजपा और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा इस मौके को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उनका यह बयान कि "कांग्रेस हिंदू विहीन हो गई है", आने वाले दिनों में असम की राजनीति में एक नया ध्रुवीकरण पैदा कर सकता है।