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March 20 2026 02:33 am

बिहार में बदल रही है हवा? JDU के बिना भी BJP का ‘स्ट्राइक रेट’ हो रहा है सुपर-हिट!

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बिहार की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कहना हमेशा से ही मुश्किल रहा है। यहां दोस्ती और दुश्मनी बदलने में देर नहीं लगती। लेकिन पिछले कुछ चुनावों के आंकड़े एक ऐसी कहानी कह रहे हैं, जिसे देखकर लगता है कि बिहार की राजनीति की ‘पटकथा’ अब बदल रही है।

जो बीजेपी कल तक नीतीश कुमार की JDU की ‘बैसाखी’ के सहारे बिहार में चलती थी, अब वो धीरे-धीरे अपने दम पर ‘मैराथन दौड़ने’ लगी है। वहीं दूसरी ओर, नीतीश कुमार की JDU और लालू यादव की RJD, दोनों ही अपने पुराने गढ़ को बचाने के लिए संघर्ष करती दिख रही हैं।

आंकड़ों का ‘एक्स-रे’ क्या कहता है?

अगर हम 2014 से लेकर अब तक हुए चुनावों के आंकड़ों का ‘एक्स-रे’ करें, तो तीन बड़ी और साफ तस्वीरें उभरकर सामने आती हैं:

1. BJP का बढ़ता ‘ग्राफ’ और सुपर-हिट ‘स्ट्राइक रेट’

  • 2014 के बाद से, चाहे लोकसभा का चुनाव हो या विधानसभा का, बीजेपी का वोट शेयर (यानी उसे मिलने वाले कुल वोट) लगातार बढ़ रहा है
  • सबसे चौंकाने वाली बात है बीजेपी का ‘स्ट्राइक रेट’ (लड़ी गई सीटों में से जीती गई सीटों का प्रतिशत)। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा, उनमें से लगभग 67% सीटें जीतीं। यह JDU और RJD, दोनों से कहीं बेहतर था।
  • यह आंकड़े दिखाते हैं कि अब बीजेपी सिर्फ ‘शहरी’ या ‘ऊंची जाति’ की पार्टी नहीं रही, बल्कि उसकी पकड़ गांव-गांव तक और हर वर्ग में मजबूत हो रही है।

2. JDU का ‘ढलता सूरज’

  • नीतीश कुमार भले ही बिहार के मुख्यमंत्री हों, लेकिन उनकी पार्टी JDU का ग्राफ लगातार नीचे की ओर जा रहा है।
  • पार्टी का वोट शेयर भी घट रहा है और जीती हुई सीटों की संख्या भी कम हो रही है। पिछले चुनाव में JDU का स्ट्राइक रेट बीजेपी के मुकाबले बहुत कम था, जो यह दिखाता है कि अब ‘नीतीश फैक्टर’ उतना मजबूत नहीं रहा।

3. RJD: अपने ही ‘किले’ में संघर्ष

  • लालू यादव की RJD का सबसे मजबूत किला है उनका ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण।
  • लेकिन, आंकड़े दिखाते हैं कि अब RJD भी अपने इस पारंपरिक वोट बैंक को पूरी तरह से एक साथ रखने में संघर्ष कर रही है और इससे बाहर निकलकर दूसरे वर्गों में अपनी पैठ नहीं बना पा रही है।

2025 का ‘महा-मुकाबला’ होगा और भी दिलचस्प
ये आंकड़े सिर्फ अतीत की कहानी नहीं हैं, ये भविष्य की राजनीति के संकेत भी हैं। एक तरफ जहां बीजेपी अब अपने दम पर ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आने को तैयार दिख रही है, वहीं दूसरी ओर JDU और RJD अपने-अपने वजूद को बचाने की लड़ाई लड़ रही हैं।

और अब इस लड़ाई में प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी के रूप में एक और खिलाड़ी के आने से, 2025 का विधानसभा चुनाव बिहार के इतिहास का सबसे दिलचस्प और अप्रत्याशित मुकाबला होने जा रहा है।