500 सालों का इंतजार खत्म! अयोध्या में PM मोदी ने फहराया राम मंदिर का विजय ध्वज, जानें पूरी टाइमलाइन

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अयोध्या: 25 नवंबर 2025 - यह तारीख इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। सैकड़ों सालों के संघर्ष और 5 साल के अथक निर्माण कार्य के बाद, आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण औपचारिक रूप से पूरा हो गया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैदिक मंत्रोच्चार और 'जय श्री राम' के जयकारों के बीच, राम मंदिर के स्वर्ण शिखर पर केसरिया 'धर्म ध्वजा' फहराई। यह विजय पताका इस बात का प्रतीक है कि सदियों का इंतजार अब खत्म हो चुका है और रामलला अपने भव्य महल में पूरी तरह से विराजमान हो गए हैं।

आइए, एक नजर डालते हैं उस ऐतिहासिक सफर पर, जिसने इस सपने को साकार किया...

राम मंदिर निर्माण की पूरी टाइमलाइन: संघर्ष से विजय तक

  • 9 नवंबर 2019: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
    यह वह ऐतिहासिक दिन था, जब दशकों पुराने विवाद का अंत हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि का मालिकाना हक हिंदुओं को सौंप दिया और राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। कोर्ट ने मस्जिद के निर्माण के लिए भी अलग से जमीन देने का आदेश दिया।
  • 5 अगस्त 2020: PM मोदी ने रखी नींव
    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भव्य भूमि पूजन समारोह में राम मंदिर की आधारशिला रखी। इसी के साथ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया, जिसे मंदिर निर्माण की पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई।
  • 22 जनवरी 2024: "रामलला घर आए"
    करोड़ों भारतीयों का सपना उस दिन साकार हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य राम मंदिर का उद्घाटन किया। पूरे विधि-विधान के साथ रामलला की मूर्ति की 'प्राण प्रतिष्ठा' की गई। यह दिन किसी दिवाली से कम नहीं था, जिसमें सचिन तेंदुलकर से लेकर रणबीर कपूर जैसी सैकड़ों हस्तियां भी शामिल हुईं।
  • 6 जून 2025: सजा 'राम दरबार'
    मंदिर के पहले तल पर भव्य 'राम दरबार' की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इस दरबार में भगवान राम, माता सीता, भाई लक्ष्मण और भक्त हनुमान एक साथ सिंहासन पर विराजमान हैं।
  • 25 नवंबर 2025: शिखर पर विजय ध्वज
    आज, जब मंदिर की तीनों मंजिलों का निर्माण कार्य पूरा हो गया, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के शिखर पर 'धर्म ध्वजा' फहराकर इस महायज्ञ की पूर्णाहुति की।

यह ध्वज सिर्फ एक पताका नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, संघर्ष और विजय का प्रतीक है, जो अब अनंत काल तक अयोध्या के आसमान में शान से लहराता रहेगा।