रानी मुखर्जी और मर्दानी का वो अनकहा कनेक्शन, जो उन्हें असली पुलिस अफसरों के बेहद करीब ले आया
News India Live, Digital Desk : जब हम पर्दे पर किसी मज़बूत महिला पुलिस अफसर को गुंडों से भिड़ते और सिस्टम की बुराइयों को खत्म करते देखते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम रानी मुखर्जी का आता है। 'मर्दानी' फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया 'शिवानी शिवाजी रॉय' का किरदार सिर्फ एक फिल्मी कैरेक्टर नहीं, बल्कि ताकत और हिम्मत का प्रतीक बन गया है।
हाल ही में रानी ने अपनी इस मशहूर फ्रैंचाइजी और रियल लाइफ पुलिस फोर्स के बारे में कुछ ऐसी बातें साझा कीं, जो वाकई आपको भावुक कर देंगी।
ये सिर्फ एक्टिंग नहीं, एक श्रद्धांजलि है
रानी मुखर्जी का मानना है कि 'मर्दानी' के जरिए उन्होंने जो कुछ भी पर्दे पर किया, वह दरअसल देश के पुलिसकर्मियों के प्रति उनका सम्मान दिखाने का एक जरिया था। रानी ने साफ़ कहा "मदार्नी फ्रैंचाइजी उन सभी पुलिस अफसरों को मेरा सलाम (Salute) है, जो बिना थके, दिन-रात हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं।"
खिलाड़ी और पुलिस की मेहनत में समानता
बातचीत के दौरान रानी काफी गहराई से अपनी बात रखती दिखीं। उन्होंने महसूस किया कि एक एक्टर के तौर पर हम तो सिर्फ कुछ घंटों की शूटिंग करते हैं, लेकिन असल जिंदगी में एक पुलिस अफसर की ड्यूटी कितनी कठिन होती है, इसका अंदाज़ा हम घर बैठे नहीं लगा सकते। उनके लिए 'शिवानी' का किरदार निभाना इसलिए भी खास था क्योंकि इसके जरिए वो उन जांबाज अफसरों की भावनाओं को जनता तक पहुँचाना चाहती थीं।
क्यों पसंद की गई 'मर्दानी'?
इस फिल्म की सफलता का एक बड़ा कारण इसकी 'सच्चाई' थी। इसमें पुलिस को कोई 'सुपरह्यूमन' नहीं, बल्कि एक ऐसा इंसान दिखाया गया जो अपनी फैमिली और फर्ज के बीच तालमेल बिठाते हुए अपराधियों से लड़ता है। रानी ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि आज वो जहाँ भी जाती हैं, उन्हें असली पुलिस अधिकारियों से जो प्यार और इज्जत मिलती है, वो उनके लिए किसी भी अवॉर्ड से कहीं बढ़कर है।
हमारी सुरक्षा, उनकी जिम्मेदारी
रानी की इन बातों ने एक बार फिर हमें ये सोचने पर मजबूर कर दिया है कि त्यौहार हो या कोई संकट, जो वर्दीधारी हमारी रक्षा के लिए सड़कों पर खड़े रहते हैं, उनके प्रति हमें और भी ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। रानी मुखर्जी की 'मर्दानी' की अगली कड़ी का फैंस को इंतज़ार तो है ही, पर उससे भी ज्यादा इंतज़ार है उस जज्बे का जो वो पर्दे पर लेकर आती हैं।
क्या आपको भी लगता है कि 'मर्दानी' जैसी फिल्में हमारे असली हीरोज की कहानी सही ढंग से दिखा पाती हैं? हमें ज़रूर बताएं।