राजस्थान की धरती अब उगलेगी सोना बांसवाड़ा और उदयपुर में नीलामी की तैयारी शुरू

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News India Live, Digital Desk: हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि भारत कभी 'सोने की चिड़िया' हुआ करता था। लेकिन अब लगता है कि यह कहावत राजस्थान में हकीकत बनने जा रही है। राजस्थान, जो अपनी मेहमाननवाजी और रेगिस्तान के लिए जाना जाता है, अब जल्द ही 'गोल्ड हब' बनने वाला है।

राज्य सरकार ने प्रदेश में दबे अरबों रुपये के सोने के भंडारों (Gold Mines) को बाहर निकालने के लिए कमर कस ली है। ख़बरों के मुताबिक़, बांसवाड़ा और उदयपुर जिले में सोने की खानों की ई-नीलामी (E-Auction) की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में या शुरू होने की कगार पर है।

कहां छिपा है यह खजाना?
सबसे ज्यादा चर्चा बांसवाड़ा जिले की है। यहां की घाटोल तहसील के भूकिया-जगपुरा (Bhukhia-Jagpura) इलाके में सोने के विशाल भंडार मिले हैं। भूवैज्ञानिकों का अनुमान है कि यहां जमीन के नीचे टन के हिसाब से सोना और तांबा दबा हुआ है। इसके अलावा, उदयपुर के भी कुछ ब्लॉक्स को इस नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया है।

नीलामी से क्या होगा?
खान विभाग (Mines Department) इन ब्लॉक्स के लिए कंपोजिट लाइसेंस (CL) की नीलामी कर रहा है। इसका मतलब है कि जो बड़ी-बड़ी माइनिंग कंपनियां सबसे ऊंची बोली लगाएंगी, उन्हें ही यहां खुदाई करने और सोना निकालने का हक़ मिलेगा।

आम जनता को क्या फायदा?
आप सोच रहे होंगे कि सोना तो सरकार या कंपनी का होगा, हमें क्या?

  1. सरकार की कमाई: इस नीलामी से राजस्थान सरकार के खजाने में हजारों करोड़ रुपये आएंगे, जिनका इस्तेमाल सड़कों, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं में होगा।
  2. रोजगार की बहार: जब खानों में काम शुरू होगा, तो बांसवाड़ा और उदयपुर के स्थानीय युवाओं के लिए हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां (Jobs) पैदा होंगी।
  3. अर्थव्यवस्था को बूस्ट: इस प्रोजेक्ट से आसपास के इलाकों में मार्केट और व्यापार बढ़ेगा।

यह कहना गलत नहीं होगा कि यह प्रोजेक्ट राजस्थान की तकदीर बदल सकता है। सदियों से मिट्टी के नीचे सोया यह खजाना अब बाहर आने को बेताब है। अब देखना दिलचस्प होगा कि देश-दुनिया की कौन सी बड़ी कंपनी राजस्थान में यह 'गोल्डन खुदाई' शुरू करती है।