राजस्थान के सरकारी अस्पतालों का चौंकाने वाला सच, CAG रिपोर्ट ने खोल दी हर पोल, मरीजों की जान खतरे में

Post

News India Live, Digital Desk: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General - CAG) की हालिया रिपोर्ट ने राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की है. यह रिपोर्ट स्वास्थ्य क्षेत्र में व्याप्त कई कमियों और लापरवाही को उजागर करती है, जिससे पता चलता है कि जयपुर और बाड़मेर जैसे बड़े और सीमावर्ती जिलों में भी आम जनता को उचित स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं. इस रिपोर्ट ने राजस्थान सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

CAG रिपोर्ट के मुख्य खुलासे:

  1. दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी:
    • रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के कई सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में आवश्यक दवाओं की भारी कमी है. मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है.
    • जीवन रक्षक उपकरण और आवश्यक चिकित्सा उपकरण भी कई अस्पतालों में या तो खराब पड़े हैं या पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं. विशेषकर बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिलों में यह स्थिति और भी गंभीर पाई गई है.
  2. डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की भारी कमी:
    • CAG ने इस बात पर जोर दिया है कि राजस्थान में डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के स्वीकृत पदों में से एक बड़ी संख्या में पद खाली पड़े हैं. जयपुर जैसे शहरों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहीं ग्रामीण इलाकों और दूरदराज के जिलों जैसे बाड़मेर में स्थिति विकट है.
    • इस कमी के कारण मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ बढ़ रहा है और मरीजों को सही समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है.
  3. बुनियादी ढांचे में कमी:
    • रिपोर्ट में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें पर्याप्त बिस्तर, स्वच्छ शौचालय, पेयजल और बिजली की आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव शामिल है.
  4. कुप्रबंधन और निगरानी का अभाव:
    • दवाओं की खरीद, वितरण और चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव में कुप्रबंधन और उचित निगरानी का अभाव भी रिपोर्ट में उजागर किया गया है. फंड के उपयोग में अनियमितताओं का भी जिक्र है.

जनता पर पड़ रहा असर:

इन कमियों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है. गरीब और वंचित वर्ग के लोग, जो निजी अस्पतालों का खर्च नहीं उठा सकते, उन्हें सरकारी अस्पतालों में भी इलाज के लिए जूझना पड़ रहा है. सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ अक्सर जान-माल के लिए गंभीर खतरा बन जाती हैं.

CAG की यह रिपोर्ट राजस्थान सरकार के लिए एक वेक-अप कॉल है. इन गंभीर खामियों को तुरंत दूर करने और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है.