The secret of Ramayana : 6 महीने सोने का वरदान कुंभकर्ण ने मांगा नहीं, बल्कि मिला था, जानिए कैसे हुई थी ये चूक

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News India Live, Digital Desk: The secret of Ramayana : रामायण के किस्से हम सबने बचपन से सुने हैं. राम की वीरता, रावण का अहंकार और हनुमान की भक्ति. लेकिन इस महागाथा में एक ऐसा पात्र भी है, जिसे याद करते ही एक विशाल शरीर और गहरी नींद का ख्याल आता है - और वो है कुंभकर्ण. हम सब यही जानते हैं कि कुंभकर्ण 6 महीने सोता था और 6 महीने जागता था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह गहरी नींद उसे किसी श्राप से नहीं, बल्कि एक वरदान के कारण मिली थी? और सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि उसने ऐसा वरदान कभी मांगा ही नहीं था

यह कहानी उस समय की है जब रावण, विभीषण और कुंभकर्ण, तीनों भाई अमर होने और अजेय बनने के लिए कठोर तपस्या कर रहे थे. तीनों भाइयों ने मिलकर ब्रह्म देव को प्रसन्न करने के लिए हज़ारों सालों तक तप किया. उनकी तपस्या की अग्नि से तीनों लोक जलने लगे और घबराकर सभी देवता ब्रह्मा जी के पास पहुंचे.

तपस्या से प्रसन्न हुए ब्रह्मा जी, पर घबरा गए देवता

जब ब्रह्मा जी तीनों भाइयों को वरदान देने के लिए प्रकट हुए, तो सारे देवता डर गए. उन्हें पता था कि रावण और कुंभकर्ण स्वभाव से असुर हैं और अगर उन्हें मनचाही शक्तियां मिल गईं, तो वे सृष्टि में हाहाकार मचा देंगे. सबसे ज़्यादा डर उन्हें कुंभकर्ण से था. कुंभकर्ण इतना शक्तिशाली था कि वह एक बार में ही सात अप्सराओं और इंद्र के ऐरावत हाथी तक को अपना भोजन बना चुका था. देवताओं को डर था कि अगर कुंभकर्ण ने इंद्रासन (इंद्र का सिंहासन) मांग लिया, तो प्रलय आ जाएगी.

घबराए हुए इंद्र और बाकी देवता मदद के लिए विद्या की देवी मां सरस्वती के पास पहुंचे. उन्होंने देवी से प्रार्थना की कि वे कुछ ऐसा करें जिससे कुंभकर्ण कोई विनाशकारी वरदान न मांग सके.

जुबान पर बैठीं मां सरस्वती और बदल गया वरदान

देवताओं की प्रार्थना सुनकर मां सरस्वती उनकी मदद करने के लिए तैयार हो गईं. जैसे ही ब्रह्मा जी ने कुंभकर्ण से वरदान मांगने को कहा, ठीक उसी पल मां सरस्वती कुंभकर्ण की जीभ (जिह्वा) पर विराजमान हो गईं.

कुंभकर्ण दिल से तो 'इंद्रासन' मांगना चाहता था, लेकिन मां सरस्वती के प्रभाव से उसकी जुबान फिसल गई और उसके मुंह से निकला 'निद्रासन' (सोने के लिए आसन). 'इंद्रासन' की जगह 'निद्रासन' सुनकर ब्रह्मा जी और सभी देवता हैरान रह गए, पर ब्रह्मा जी ने 'तथास्तु' कहकर अपना वचन पूरा कर दिया.

रावण के कहने पर ब्रह्मा जी ने बदला वरदान

जब कुंभकर्ण को अपनी गलती का एहसास हुआ, तो वह दौड़ा-दौड़ा अपने भाई रावण के पास गया. अपने भाई की यह दशा देखकर रावण को बहुत दुख हुआ. उसने ब्रह्मा जी से विनती की कि वे अपना वरदान वापस ले लें, क्योंकि यह वरदान तो श्राप जैसा है.

ब्रह्मा जी वरदान को पूरी तरह वापस तो नहीं ले सकते थे, लेकिन रावण के बहुत अनुरोध करने पर उन्होंने इसमें एक बदलाव कर दिया. उन्होंने कहा कि कुंभकर्ण 6 महीने तक गहरी नींद में सोएगा और फिर 6 महीने के लिए जागेगा. कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह भी कहा जाता है कि वह 6 महीने सोएगा और सिर्फ एक दिन के लिए जागेगा, जिसमें वह खूब भोजन करेगा और फिर से सो जाएगा.

इस तरह, एक छोटी सी चूक की वजह से, जो असल में देवताओं की एक चाल थी, कुंभकर्-ण को 6 महीने सोने का विचित्र वरदान मिला. यह कहानी हमें बताती है कि भाग्य के आगे कभी-कभी बड़े-बड़े बलवानों की भी नहीं चलती.