बीएमसी चुनाव में सब्र का फल अब और मीठा यानी देर से मिलेगा जानिए नतीजों में देरी की असली वजह

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News India Live, Digital Desk : मुंबई और महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी (BMC) के चुनाव किसी युद्ध से कम नहीं होते। हर मुंबईकर उस दिन टीवी या मोबाइल स्क्रीन से चिपका रहता है, यह जानने के लिए कि आखिर शहर का "बॉस" कौन बनने वाला है? आम तौर पर, हम और आप यही देखते आए हैं कि दोपहर तक रुझान साफ हो जाते हैं और शाम होते-होते जूलूस निकलना शुरू हो जाते हैं। लेकिन ठहरिए! इस बार शायद ऐसा न हो।

अगर आप आने वाले निकाय चुनावों में फटाफट नतीजों की उम्मीद कर रहे हैं, तो राज्य चुनाव आयोग (SEC) की नई खबर आपको थोड़ा निराश कर सकती है, या कहें कि आपके धैर्य की परीक्षा ले सकती है।

आखिर क्यों होगी देरी? (कहानी सिस्टम बदलने की)
असल में, महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने वोटों की गिनती यानी 'काउंटिंग' के पुराने तौर-तरीकों में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब तक जो सिस्टम था, उसमें चीजें तेजी से निपट जाती थीं, लेकिन अब आयोग "जल्दबाजी" से ज्यादा "सटीकता" (Accuracy) पर जोर दे रहा है।

नई प्रक्रिया के तहत, काउंटिंग के नियमों को थोड़ा और सख्त और विस्तृत बनाया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अधिकारी अब वोटों की गिनती करते समय ज्यादा समय लेंगे। जहाँ पहले फटाफट अपडेट्स आ जाते थे, वहीं अब हर राउंड के बाद पुख्ता जांच-पड़ताल हो सकती है। आसान भाषा में कहें तो, 'एरर-फ्री' (Error-free) रिजल्ट देने के चक्कर में घड़ी की सुइयां आगे बढ़ती रहेंगी।

उम्मीदवारों की धड़कनें तेज
सोचिए जरा उन नेताओं और उम्मीदवारों का क्या हाल होगा! चुनाव के नतीजे जितनी देर से आएंगे, उनका ब्लड प्रेशर उतना ही ऊपर-नीचे होता रहेगा। जब नतीजे लटकते हैं, तो अफवाहों का बाजार भी गर्म हो जाता है। इस बार सुबह 10-11 बजे जो रुझान मिलने शुरू होते थे, हो सकता है कि तस्वीर साफ होते-होते रात हो जाए।

पारदर्शिता जरूरी है
हालांकि, इसे नेगेटिव तरीके से देखने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग का मकसद बिल्कुल साफ है—भले ही थोड़ा वक्त लग जाए, लेकिन नतीजों पर कोई उंगली न उठा सके। पिछले कुछ समय में जिस तरह ईवीएम (EVM) और काउंटिंग को लेकर अलग-अलग सवाल उठते रहे हैं, उसे देखते हुए आयोग का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह देरी 'सस्पेंस' जरूर बढ़ाएगी, लेकिन साथ ही चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा भी मजबूत करेगी।

मुंबईकर क्या करें?
तो भाई, अगर आप मुंबई, ठाणे या महाराष्ट्र के किसी भी इलाके में रहते हैं, तो जब भी भविष्य में ये स्थानीय चुनाव हों, तो अपनी पॉपकॉर्न की बाल्टी भरकर रखिएगा। क्योंकि फिल्म लंबी चलने वाली है और क्लालाइमेक्स (नतीजे) के लिए आपको अपनी नींद थोड़ी खराब करनी पड़ सकती है। फिलहाल, सभी को चुनाव की तारीखों का इंतजार है, लेकिन उससे पहले "काउंटिंग का यह नया फॉर्मूला" चर्चा का विषय बन गया है।