OpenAI के वो बागी वैज्ञानिक, जिनके एक टूल ने हिला दी भारतीय IT की नींव TCS और Infosys को लगा 2 लाख करोड़ का झटका

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News India Live, Digital Desk: टेक जगत में इन दिनों एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है डारियो अमोडे (Dario Amodei)। अमोडे, जो कभी OpenAI में रिसर्च हेड थे, आज अपनी कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के माध्यम से न केवल सैम ऑल्टमैन को टक्कर दे रहे हैं, बल्कि उनके हालिया कदम ने भारत की दिग्गज आईटी कंपनियों  TCS और Infosys  के होश उड़ा दिए हैं।

फरवरी 2026 के पहले हफ्ते में एंथ्रोपिक द्वारा लॉन्च किए गए 'Claude Cowork' प्लगइन्स ने शेयर बाजार में ऐसी तबाही मचाई है, जिसे एक्सपर्ट्स "SaaSpocalypse" (सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस का विनाश) कह रहे हैं।

कौन हैं डारियो अमोडे? (The OpenAI Connection)

डारियो अमोडे OpenAI के सबसे प्रभावशाली वैज्ञानिकों में से एक थे। उन्होंने ही RLHF (Reinforcement Learning from Human Feedback) जैसी तकनीक पर काम किया, जो आज के ChatGPT की रीढ़ है। लेकिन 2021 में, एआई की सुरक्षा और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर सैम ऑल्टमैन से मतभेदों के चलते उन्होंने OpenAI छोड़ दी और अपनी बहन डेनिएला अमोडे के साथ मिलकर Anthropic की स्थापना की।

भारतीय IT के लिए 'खतरा' क्यों?

एंथ्रोपिक ने Claude Cowork के लिए 11 नए AI प्लगइन्स लॉन्च किए हैं। इनमें सबसे घातक 'Legal Automation' और 'Data Analysis' प्लगइन्स हैं।

काम का ऑटोमेशन: ये टूल्स उन कामों को चुटकियों में कर सकते हैं जिन्हें करने के लिए भारतीय आईटी कंपनियां (TCS, Infosys, Wipro) हजारों जूनियर इंजीनियर्स और बैक-ऑफिस स्टाफ को तैनात करती हैं।

बिजनेस मॉडल पर वार: भारत का आईटी उद्योग 'बिलिंग मॉडल' (घंटों और मैनपावर के हिसाब से पैसे लेना) पर टिका है। अमोडे का एआई टूल अब 'काम करने वाला' (Actor) बन गया है, न कि सिर्फ 'मददगार' (Assistant)। यह सीधे तौर पर आउटसोर्सिंग बिजनेस को रिप्लेस कर सकता है।

बाजार में मची हाहाकार (The Market Crash)

3 और 4 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर के शेयरों में 6% से 8% तक की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई।

TCS: कंपनी की मार्केट वैल्यू में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

Infosys: इसके अमेरिकी लिस्टेड शेयर (ADR) 5.5% से ज्यादा टूट गए।

Wipro, HCL और Tech Mahindra: इन सभी कंपनियों के स्टॉक्स में भारी बिकवाली हुई क्योंकि निवेशकों को डर है कि भविष्य में क्लाइंट्स इन आईटी कंपनियों को पैसे देने के बजाय एआई एजेंट्स का इस्तेमाल करेंगे।

डारियो अमोडे की 'चेतावनी'

अमोडे ने पहले ही चेतावनी दी थी कि एआई अगले 6 से 12 महीनों में वह सब कुछ करने में सक्षम होगा जो आज सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स करते हैं। उन्होंने इसे "प्रौद्योगिकी की खतरनाक किशोरावस्था" (dangerous technological adolescence) करार दिया है।

क्या यह भारतीय IT का अंत है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारतीय आईटी कंपनियों के लिए 'वेक-अप कॉल' है।

कौशल विकास (Upskilling): कंपनियों को अब 'लेबर-इंटेंसिव' काम से हटकर एआई को मैनेज करने वाले उच्च-स्तरीय समाधानों की ओर मुड़ना होगा।

इनोवेशन: उन्हें एआई के खिलाफ लड़ने के बजाय इसे अपने सर्विस पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाना होगा।