आज से बदल गया इन चीजों का दाम: दूध-घी सस्ता, पर होटल में रहना और ये चीजें हुईं महंगी
नई दिल्ली: आज से आपकी रसोई के बजट से लेकर बाहर घूमने-फिरने के खर्च तक, कई चीजों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक में लिए गए फैसले आज, 22 सितंबर से लागू हो गए हैं। कुछ चीजों पर जीएसटी की दरें बढ़ाई गई हैं, तो वहीं कुछ पर घटाई गई हैं, जिसका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।
तो चलिए, बिना किसी उलझन के, आसान भाषा में समझते हैं कि आज से आपके लिए क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा।
खुशखबरी: ये चीजें हुईं सस्ती!
आम आदमी के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर है।
- पैक्ड दूध, दही, पनीर और घी: अब पैक्ड और ब्रांडेड दूध, दही, लस्सी, पनीर और घी पर 5% जीएसटी नहीं लगेगा। इसका मतलब है कि मदर डेयरी, अमूल जैसे ब्रांड्स के ये प्रोडक्ट्स आज से सस्ते हो जाएंगे। त्योहारों से पहले यह एक बड़ी राहत है।
- 'सफल' के प्रोडक्ट्स: मदर डेयरी के 'सफल' ब्रांड के फ्रोजन मटर और अन्य सब्जियों के दाम भी कम होंगे।
जेब पर बोझ: ये चीजें हो गईं महंगी!
1. होटल में रहना हुआ महंगा:
अगर आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं और होटलों में रुकते हैं, तो यह खबर आपको निराश कर सकती है।
- अब 7,500 रुपये प्रति रात से कम किराए वाले होटल के कमरों पर भी 12% जीएसटी लगेगा। पहले यह छूट 1,000 रुपये तक थी, लेकिन अब बजट होटलों में रहना भी महंगा हो जाएगा।
2. रोजमर्रा की ये चीजें भी हुईं महंगी:
- स्टेशनरी का सामान: बच्चों की पढ़ाई से जुड़ा सामान जैसे- पेंसिल, शार्पनर, पेपर कटर, और प्रिंटिंग स्याही पर अब 12% की जगह 18% जीएसटी लगेगा, जिससे ये सब चीजें महंगी हो जाएंगी।
- LED लाइट्स और लैम्प: घर को रोशन करने वाली LED लाइट्स और लैम्प पर भी अब 12% की जगह 18% जीएसटी देना होगा।
- पानी के पंप और साइकिल पंप: किसानों और आम लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पानी के पंप और साइकिल पंप भी अब महंगे मिलेंगे।
3. अन्य सेवाएं:
- बैंक चेक बुक: बैंक द्वारा जारी की जाने वाली चेक बुक की सुविधा पर भी अब 18% जीएसटी लगेगा।
- अस्पताल के कमरे: अस्पताल में 5,000 रुपये प्रति दिन से अधिक किराए वाले (ICU को छोड़कर) कमरों पर भी 5% जीएसटी लगाया गया है, जिससे इलाज का खर्च बढ़ सकता है।
क्या करें?
इन बदलावों का सीधा असर हमारे मासिक बजट पर पड़ेगा। इसलिए, समझदारी इसी में है कि हम अपनी खरीदारी की योजना इन नई कीमतों के हिसाब से बनाएँ। दूध-घी पर तो कुछ बचत होगी, लेकिन दूसरी चीज़ों पर खर्च बढ़ सकता है, इसलिए संतुलन बनाए रखना ही समझदारी होगी।