देश के 4 और सरकारी बैंकों का नामोनिशान मिट जाएगा, जानिए आपके खाते का क्या होगा

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देश के बैंकिंग सिस्टम में एक बार फिर से बहुत बड़ा बदलाव होने की आहट सुनाई दे रही है। अगर आपका बैंक खाता भी इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ इंडिया (BOI), या बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) में है, तो यह खबर आपको सीधे तौर पर प्रभावित करने वाली है।

सरकार इन छोटे सरकारी बैंकों को देश के बड़े और मजबूत बैंकों में मिलाने (विलय करने) की तैयारी कर रही है। नीति आयोग ने इसकी सिफारिश की है, जिसका मकसद भारत के बैंकिंग सिस्टम को पहले से ज्यादा ताकतवर और दुनिया के बैंकों के सामने मुकाबले के लिए तैयार करना है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो इन चारों बैंकों का खुद का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।

सरकार यह कदम क्यों उठा रही है?

छोटे-छोटे कई बैंक होने से सरकार का खर्च बढ़ता है और डूबे हुए कर्ज (NPA) को संभालना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इन बैंकों को मिलाकर एक बड़ा बैंक बनाने से कई फायदे होंगे:

  • बैंक ज्यादा मजबूत होंगे: उनकी कर्ज देने की क्षमता बढ़ेगी।
  • खर्च कम होगा: एक ही मैनेजमेंट के तहत काम होगा।
  • ग्राहकों को बेहतर सर्विस: टेक्नोलॉजी और सुविधाओं में सुधार होगा।
  • कामकाज में तेजी आएगी: फैसले जल्दी लिए जा सकेंगे।

इससे पहले भी साल 2017 से 2020 के बीच 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर 4 बड़े बैंक बनाए जा चुके हैं, जिसके बाद देश में सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी।

तो अब देश में कौन से सरकारी बैंक बचेंगे?

अगर यह मेगा मर्जर पूरा हो जाता है, तो भविष्य में देश में सिर्फ 4 बड़े सरकारी बैंक ही रह जाएंगे:

  1. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
  2. पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
  3. बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB)
  4. केनरा बैंक

सबसे जरूरी सवाल: आपके और आपके खाते पर क्या असर होगा?

इस खबर से घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा, लेकिन आपको कुछ भागदौड़ करनी पड़ सकती है।

  • नई चेकबुक और पासबुक: जिस बड़े बैंक में आपके बैंक का विलय होगा, आपको उस बैंक की नई चेकबुक और पासबुक लेनी होगी।
  • नया IFSC/MICR कोड: आपको अपने खाते के लिए नया IFSC और MICR कोड मिलेगा, जिसे आपको जगह-जगह अपडेट कराना होगा (जैसे- SIP, बीमा पॉलिसी, आदि)।
  • थोड़ी कागजी कार्रवाई: बैंक के कुछ फॉर्म भरने पड़ सकते हैं।

हालांकि, बैंक यह प्रक्रिया ग्राहकों के लिए आसान बनाने की पूरी कोशिश करेंगे। जहां तक बैंक कर्मचारियों की बात है, सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी की नौकरी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

यह मर्जर वित्त वर्ष 2026-27 तक पूरा होने की उम्मीद है, लेकिन इसकी तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है।