अर्जुन की वो रहस्यमयी पत्नी, जिसने पानी के अंदर रचाया था विवाह और दिया था अजेय होने का वरदान
News India Live, Digital Desk : महाभारत की कथा सिर्फ युद्ध, राजनीति और धर्म-अधर्म के ज्ञान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी परतों में कई ऐसी अद्भुत और अनसुनी कहानियां छिपी हैं जो हमें हैरान कर देती हैं। हम सब अर्जुन की पत्नी के रूप में द्रौपदी, सुभद्रा और चित्रांगदा को तो जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को उनकी चौथी पत्नी के बारे में पता है, जो एक नागकन्या थीं और जिनसे अर्जुन का विवाह पाताल लोक में हुआ था।
यह कहानी उस समय की है, जब पांडव इंद्रप्रस्थ में रह रहे थे। एक नियम के अनुसार, जब एक भाई द्रौपदी के साथ एकांत में होता, तो दूसरे किसी भाई को वहाँ जाने की अनुमति नहीं थी। एक बार गलती से यह नियम अर्जुन से टूट गया, जिसके दंड स्वरूप उन्हें 12 वर्षों के वनवास पर जाना पड़ा और ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना था।
जब गंगा में समा गए अर्जुन
अपने वनवास के दौरान घूमते-घूमते अर्जुन हरिद्वार, यानी गंगाद्वार पहुँचे। एक दिन जब वे गंगा नदी में स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दे रहे थे, तभी किसी अदृश्य शक्ति ने उन्हें पानी के अंदर खींच लिया। अर्जुन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही वे खुद को एक अद्भुत और भव्य महल में पा चुके थे। यह नागलोक था।
उनके सामने एक बेहद खूबसूरत स्त्री खड़ी थी। उसने अपना परिचय नागकुमारी उलूपी के रूप में दिया, जो नागों के राजा कौरव्य की पुत्री थी। उलूपी ने अर्जुन को बताया कि वह मन ही मन उनसे प्रेम करती है और उनसे विवाह करना चाहती है।
अर्जुन का धर्मसंकट और उलूपी का तर्क
अर्जुन ने उलूपी के विवाह प्रस्ताव को विनम्रता से अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा, "हे देवी, मैं आपके प्रेम का सम्मान करता हूँ, लेकिन मैं 12 वर्षों के लिए ब्रह्मचर्य व्रत के पालन की प्रतिज्ञा से बंधा हुआ हूँ। इसलिए मैं आपसे विवाह नहीं कर सकता।"
अर्जुन की बात सुनकर उलूपी मुस्कुराई और एक ऐसा तर्क दिया, जिसका अर्जुन के पास कोई जवाब नहीं था। उलूपी ने कहा, "हे अर्जुन! आपकी ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा द्रौपदी के संबंध में है, मेरे लिए नहीं। आपका व्रत यह है कि आप 12 वर्षों तक द्रौपदी के साथ नहीं रहेंगे। किसी दूसरी स्त्री को स्वीकार करने से आपका व्रत खंडित नहीं होगा। मुझ पर कृपा कीजिए और मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कीजिए।"
उलूपी के इस तर्क और प्रेम से अर्जुन प्रसन्न हुए और उन्होंने विवाह के लिए अपनी सहमति दे दी।
एक रात का विवाह और अमूल्य वरदान
अर्जुन ने उस रात नागलोक में ही उलूपी के साथ समय बिताया। इसी मिलन से उनके एक वीर पुत्र का जन्म हुआ, जिसका नाम इरावान रखा गया, जिसने बाद में महाभारत के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सुबह होने पर उलूपी ने अर्जुन को न सिर्फ विदा किया, बल्कि उन्हें एक ऐसा शक्तिशाली वरदान भी दिया जो भविष्य में उनके बहुत काम आया। उलूपी ने अर्जुन को वरदान दिया कि जल में उन्हें कोई भी प्राणी या अस्त्र-शस्त्र पराजित नहीं कर पाएगा और वे जल में अपनी इच्छानुसार रह सकेंगे।
यह कहानी सिर्फ एक प्रेम कथा नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि अर्जुन का चरित्र कितना आकर्षक था और महाभारत की दुनिया कितनी विशाल और रहस्यमयी थी।