चीन और पाकिस्तान से निबटने का सबसे खतरनाक प्लान, जानिए क्या है Rocket Force जिसकी मांग सेना ने की है
News India Live, Digital Desk : आजकल हम अक्सर सुनते हैं कि "फ्यूचर वॉर" यानी आने वाले समय की लड़ाइयां पुरानी लड़ाइयों से बिल्कुल अलग होंगी। अब वो ज़माना धीरे-धीरे जा रहा है जब सेनाएं आमने-सामने खड़ी होकर सिर्फ बंदूक और तोपों से लड़ती थीं। आज दौर है "नॉन-कांटेक्ट वॉरफेयर" का। यानी दुश्मन को छुए बिना, उसे देखे बिना, हज़ारों किलोमीटर दूर से ही उसके ठिकानों को बर्बाद कर देना।
इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना अब एक बड़ी तैयारी में जुटी है, और वो तैयारी है India Integrated Rocket Force (IRF) बनाने की।
अब आप सोच रहे होंगे कि हमारे पास तो पहले से मिसाइलें हैं, तो ये नई रॉकेट फोर्स क्या बला है? चलिए, इसे बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।
आखिर क्या है यह Rocket Force?
साधारण शब्दों में कहें तो रॉकेट फोर्स सेना का एक ऐसा खास हिस्सा होता है, जिसका काम सिर्फ और सिर्फ अलग-अलग दूरी की मिसाइलों और रॉकेट को संभालना और दागना होता है। अभी क्या होता है कि कुछ मिसाइलें आर्मी के पास हैं, कुछ एयरफोर्स के पास। लेकिन जब रॉकेट फोर्स बन जाएगी, तो लंबी दूरी तक मार करने वाली सारी मिसाइलें और रॉकेट सिस्टम एक ही कमांड के नीचे आ जाएंगे।
इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि फैसला लेने में देरी नहीं होगी। जैसे ही ऑर्डर मिलेगा, सटीकता से हमला किया जा सकेगा। इसे आप "आर्टिलरी का सुपर अपग्रेडेड वर्जन" मान सकते हैं।
हमें इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी? (China vs India Military Power)
सच बात तो ये है कि हमें इसकी ज़रूरत अपने पड़ोसियों को देखकर महसूस हुई। आप जानते ही हैं कि चीन हमारा पड़ोसी है और उसके साथ सीमा पर तनाव अक्सर बना रहता है। चीन के पास पहले से ही एक dedicated 'PLA Rocket Force' है। उनके पास ऐसी मिसाइलें हैं जो हज़ारों किलोमीटर दूर से हमला कर सकती हैं।
भारतीय रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हमें चीन की बराबरी करनी है या उसे अपनी ताकत का अहसास दिलाना है, तो हमें भी India’s own Rocket Force की सख्त ज़रूरत है। सेना ने भी महसूस किया कि लड़ाई के शुरुआती कुछ घंटों में अगर हम दुश्मन के कम्युनिकेशन सेंटर, रडार और बंकरों को अपनी जमीन से ही उड़ा दें, तो हमारी जीत पक्की हो जाती है। इसे ही स्ट्रेटेजिक डेटरेंस (Strategic Deterrence) कहते हैं—यानी दुश्मन हमला करने से पहले सौ बार सोचे।
इसमें कौन से हथियार शामिल हो सकते हैं?
यह बहुत ही दिलचस्प है। जब यह फोर्स पूरी तरह तैयार हो जाएगी, तो इसमें भारत की सबसे ताकतवर मिसाइलें शामिल होंगी।
इसमें मुख्य रूप से 'प्रलय' (Pralay Missile) जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का रोल बहुत बड़ा होगा। प्रलय मिसाइल 150 से 500 किलोमीटर तक दुश्मन के किसी भी ठिकाने को मिट्टी में मिला सकती है। इसके अलावा, हमारी सबसे भरोसेमंद ब्रह्मोस (BrahMos) क्रूज मिसाइल और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (Pinaka MBRL) भी इस फोर्स की रीढ़ की हड्डी बनेंगे।
सोचिए, एक तरफ प्रलय जैसी बैलिस्टिक मिसाइल और दूसरी तरफ ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल जब ये दोनों एक साथ एक ही कमान के तहत काम करेंगी, तो सरहद पर दुश्मन की क्या हालत होगी।
भविष्य की तैयारी
हमारे पूर्व सेना प्रमुख और रक्षा जानकारों ने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि "लॉन्ग रेंज प्रेसिजन स्ट्राइक" (सटीक दूरी पर मार करना) आज की ज़रूरत है। रॉकेट फोर्स बनने से भारत "आत्मनिर्भर भारत" की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाएगा। हम अपनी तकनीक, अपने रॉकेट और अपनी फोर्स के दम पर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।
कुल मिलाकर बात यह है कि रॉकेट फोर्स का बनना सिर्फ हथियारों का जखीरा बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह दुनिया को बताने का तरीका है कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए अब किसी भी हद तक जाने को और आधुनिक तकनीक अपनाने को पूरी तरह तैयार है।