नवरात्रि का पहला क़दम: ऐसे करें माँ शैलपुत्री का स्वागत कि नौ दिन बरसती रहे कृपा
वो इंतज़ार खत्म हुआ... ढोल-नगाड़ों की आवाज़, बाज़ारों में चुनरियों की चमक और हवा में एक ख़ास पवित्रता बता रही है कि माँ हमारे घर पहुँच गई हैं। माँ दुर्गा की भक्ति और आराधना के नौ दिव्य दिन, नवरात्रि, आज से शुरू हो गए हैं। और इस पावन यात्रा का पहला पड़ाव माँ के प्रथम और सबसे शांत स्वरूप - माँ शैलपुत्री को समर्पित है।
पहला दिन सिर्फ़ कलश स्थापना का ही नहीं, बल्कि अपने अंदर की शक्ति की नींव रखने का भी दिन है.
कौन हैं माँ शैलपुत्री और हमें उनसे क्या सीखना चाहिए?
"शैल" यानी पर्वत (हिमालय) और "पुत्री" यानी बेटी. माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं. नंदी पर सवार, हाथ में त्रिशूल और कमल लिए माँ का यह स्वरूप हमें स्थिरता, दृढ़ता और संकल्प लेना सिखाता है. उनकी पूजा करके हम असल में अपने जीवन की नींव को मज़बूत करते हैं, ताकि कोई भी तूफ़ान हमें हिला न सके.
पूजा का शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना की सरल विधि
नवरात्रि की आत्मा बसती है घटस्थापना या कलश स्थापना में. यह सिर्फ़ एक कलश नहीं, बल्कि नौ दिनों के लिए हमारे घर में माँ की शक्ति का प्रतीक होता है.
पूजा और घटस्थापना के शुभ मुहूर्त:
- घटस्थापना का मुहूर्त: इस खंड में आमतौर पर विशिष्ट समय (मुहूर्त) होगा, लेकिन चूंकि स्रोत लेख और वर्तमान संदर्भ भविष्य की घटना (2025) के लिए एक विशिष्ट, सत्यापन योग्य तारीख/समय प्रदान नहीं करते हैं, इसलिए गलत सूचना से बचने के लिए इसे सामान्य रूप से बताना सबसे अच्छा है।
- अभिजीत मुहूर्त: यदि आप सुबह के मुहूर्त में स्थापना नहीं कर पाए, तो दिन का सबसे शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त भी स्थापना के लिए उत्तम है.
कलश स्थापना की सबसे आसान विधि (जो कोई भी कर सकता है):
- जगह को पवित्र करें: सबसे पहले पूजा करने की जगह को गंगाजल छिड़ककर साफ़ और पवित्र कर लें.
- वेदी बनाएं: एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. अब चौकी पर थोड़े चावल रखकर मिट्टी की वेदी बनाएं और उस पर जौ बो दें.
- कलश तैयार करें: तांबे या मिट्टी के कलश पर सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं और गले पर मौली (कलावा) बांधें.
- कलश में डालें ये चीज़ें: अब कलश में गंगाजल (या साफ़ जल) भरें. फिर इसमें एक सुपारी, कुछ सिक्के, अक्षत (बिना टूटे चावल), दूर्वा घास और आम के पत्ते डालें.
- नारियल स्थापित करें: एक नारियल पर लाल चुनरी लपेटकर उसे कलश के मुख पर आम के पत्तों के ऊपर रख दें.
- देवी का आह्वान करें: अब इस कलश को जौ वाली वेदी के बीच में रख दें और हाथ जोड़कर सभी देवी-देवताओं और माँ दुर्गा का आह्वान करें कि वे नौ दिनों तक इस कलश में वास करें.
- अखंड ज्योत जलाएं: इसके बाद माँ दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के सामने देसी घी का दीपक जलाएं, जिसे नौ दिनों तक जलाए रखने की कोशिश की जाती है.
अब आपकी घटस्थापना पूर्ण हो चुकी है. इसके बाद माँ शैलपुत्री की पूजा करें, उन्हें सफ़ेद फूल और घी का भोग लगाएं और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.
यह पहला दिन सिर्फ़ एक शुरुआत है. पूरी श्रद्धा और साफ़ मन से की गई यह पूजा आपके आने वाले नौ दिनों को भक्ति और ऊर्जा से भर देगी.