राजस्थान के छोटे शहरों की बदलेगी सूरत नए मास्टर प्लान से होगा कायाकल्प, अलवर समेत कई जिलों के लिए बड़ी योजना
News India Live, Digital Desk: राजस्थान सरकार प्रदेश के छोटे शहरों और कस्बों के नियोजित विकास (Planned Development) को लेकर एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य के नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) विभाग ने प्रदेश के कई छोटे शहरों के लिए नए मास्टर प्लान (Master Plans) तैयार करने की कवायद तेज कर दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य इन शहरों में बेतरतीब निर्माण को रोकना, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक शहरी ढांचे को तैयार करना है। विशेष रूप से अलवर जैसे तेजी से बढ़ते औद्योगिक और आवासीय केंद्र के लिए 'मास्टर प्लान 2051' की रूपरेखा तैयार की गई है।
अलवर मास्टर प्लान 2051: 12 लाख की आबादी का लक्ष्य
अलवर शहर के भविष्य को देखते हुए तैयार किए गए नए मास्टर प्लान में कई क्रांतिकारी बदलाव प्रस्तावित हैं:
शहरी सीमा का विस्तार: अगले 26 वर्षों की जरूरतों को देखते हुए अलवर की शहरी सीमा में 86 आसपास के गांवों को शामिल किया जाएगा। इससे शहर का क्षेत्रफल काफी बढ़ जाएगा।
आबादी का अनुमान: मास्टर प्लान 2051 का लक्ष्य वर्ष 2051 तक शहर की संभावित 12 लाख से अधिक की आबादी को व्यवस्थित आवास और सुविधाएं प्रदान करना है।
भूमि उपयोग (Land Use): योजना में आवासीय, औद्योगिक, व्यावसायिक और ग्रीन बेल्ट के लिए स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की गई हैं। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे कॉरिडोर के पास नए औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे।
छोटे शहरों के लिए 'विज़न 2047'
राज्य सरकार केवल बड़े शहरों पर ही नहीं, बल्कि मध्यम और छोटे दर्जे के शहरों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। विभाग ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण अधिसूचनाएं जारी की हैं:
सीकर और डीडवाना: सीकर नगरीय क्षेत्र के लिए वर्ष 2047 तक का मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वहीं, डीडवाना मास्टर प्लान-2023 की अवधि को बढ़ाकर नए प्लान की तैयारी की जा रही है।
बांरा और अन्य कस्बे: बांरा जिले के सीसवाली और चित्तौड़गढ़ जैसे शहरों के मास्टर प्लान की समय सीमा में विस्तार किया गया है ताकि नए प्लान आने तक विकास कार्य सुचारू रूप से चल सकें।
बजट 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दीया कुमारी ने हालिया बजट में शहरी विकास के लिए भारी-भरकम प्रावधान किए हैं:
मिनी सचिवालय: अलवर समेत 8 नए जिलों में 3000 करोड़ रुपये की लागत से मिनी सचिवालय भवनों का निर्माण होगा।
सड़क और ओवरब्रिज: अलवर-बांदीकुई खंड में करीब 70 करोड़ की लागत से ओवरब्रिज और खैरथल-तिजारा में नए प्रशासनिक भवन प्रस्तावित हैं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रेनिंग: अलवर समेत प्रमुख शहरों के ITIs में 'इलेक्ट्रिक व्हीकल मैकेनिक' ट्रेनिंग शुरू की जाएगी, जिससे युवाओं को नए जमाने के रोजगार मिल सकें।
नियोजित विकास के क्या होंगे फायदे?
मास्टर प्लान लागू होने से इन शहरों की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी। संकरी गलियों की जगह चौड़ी सड़कें होंगी, जल निकासी (Drainage) के लिए व्यवस्थित नाले बनेंगे और पार्कों व सामुदायिक केंद्रों के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी जाएगी। इससे न केवल स्थानीय निवासियों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि छोटे शहरों में निवेश और उद्योगों के लिए भी बेहतर माहौल तैयार होगा।