बिहार के गरीबों का सपना टूटा? केंद्र से नहीं मिला पैसा, आधे-अधूरे पड़े हैं 9 लाख मकान

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News India Live, Digital Desk : हर गरीब आदमी अपनी ज़िंदगी में बस एक ही बड़ा सपना देखता है सिर पर एक पक्की छत हो, ताकि गर्मी, बारिश और ठंड में उसका परिवार सुकून से सो सके। इसी उम्मीद के साथ 'प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)' शुरू की गई थी। लेकिन बिहार के लाखों गरीब परिवारों के लिए एक बुरी खबर आ रही है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, बिहार में 9 लाख से ज्यादा घरों का निर्माण बीच मझधार में लटक गया है। और इसकी वजह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि "पैसे की कमी" है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार (मोदी सरकार) की तरफ से फंड जारी न होने के कारण यह नौबत आई है।

आखिर पेंच फंसा कहां है?

इसे आसान भाषा में समझिए। पीएम आवास योजना में घर बनाने का खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाती हैं। इसका एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार देती है। लेकिन बिहार सरकार के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें केंद्र से मिलने वाले कोटे का पैसा नहीं मिल पा रहा है।

जब तक केंद्र से हरी झंडी (और पैसा) नहीं मिलती, तब तक राज्य सरकार अकेले इतने बड़े पैमाने पर काम नहीं खींच सकती। नतीजा यह हुआ है कि 9 लाख परिवारों का 'अपना घर' अभी फाइलों में और नींव के पत्थरों तक ही सीमित रह गया है।

किसकी गलती, किसकी सज़ा?

इस पूरे मामले में गलती चाहे सिस्टम की हो या फिर सरकारों के बीच तालमेल की, लेकिन इसकी सज़ा गरीब जनता को भुगतनी पड़ रही है।
सोचिए उस मजदूर के बारे में जिसने यह सोचकर अपनी झोपड़ी हटा दी थी कि अब पक्का मकान बनेगा। अगर फंड नहीं आया, तो वह अपने बीवी-बच्चों को लेकर कहां जाएगा? यह सवाल बहुत बड़ा है।

ग्रामीण विकास विभाग के सूत्रों का कहना है कि उन्होंने कई बार केंद्र को प्रस्ताव भेजा, मांग की, लेकिन वहां से फंड रिलीज नहीं हुआ। इसी वजह से नए वित्तीय वर्ष में नए टारगेट भी तय नहीं हो पा रहे हैं और पुराने (Backlog) घर भी पूरे नहीं हो रहे हैं।

इंतजार की घड़ियाँ हुईं लंबी

ऐसा नहीं है कि काम पूरी तरह बंद है, लेकिन रफ़्तार न के बराबर है। बिहार सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि किसी तरह केंद्र से यह राशि मिले ताकि काम फिर से शुरू हो सके। लेकिन अभी तक जो हालात हैं, उसे देखकर यही लगता है कि लाभार्थियों को अभी अपनी बारी के लिए और लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है।

उम्मीद है कि सरकारों के बीच की यह 'फंड वाली लड़ाई' जल्द सुलझेगी और बिहार के उन 9 लाख परिवारों के आंगन में भी खुशियां लौटेंगी जो पक्की छत की आस लगाए बैठे हैं।