दिवाली पर जिस ‘देसी घी’ से बना रहे हैं लड्डू, कहीं वो ‘नकली जहर’ तो नहीं? सावधान!
त्योहारों का मौसम है... घर में दिवाली की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हवा में पकवानों की खुशबू घुलने लगी है और हम सब बाजार से ढेर सारा ‘शुद्ध देसी घी’ खरीदकर ला रहे हैं, ताकि दिवाली के लड्डू, गुजिया और पूरियां स्वादिष्ट बनें।
लेकिन रुकिए! क्या आप जिस घी को ‘शुद्ध’ और ‘असली’ समझकर खरीद रहे हैं, वह वाकई में असली है? दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे ‘पाप’ के कारखाने का भंडाफोड़ किया है, जिसे जानने के बाद आप बाजार से घी खरीदने से पहले सौ बार सोचेंगे।
त्योहारों के इस मौके पर आपकी सेहत से सबसे बड़ा खिलवाड़ करने वाले एक बड़े रैकेट को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा है।
पतंजलि और मदर डेयरी के नाम पर बिक रहा था ‘नकली माल’
दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में, ये धोखेबाज नामी-गिरामी और भरोसेमंद ब्रांड्स जैसे पतंजलि (Patanjali) और मदर डेयरी (Mother Dairy) के नकली डिब्बे और पैकेट बनाकर उनमें ‘नकली घी’ भरकर बेच रहे थे। पुलिस ने मौके से 1600 किलो से भी ज्यादा ऐसा मिलावटी घी जब्त किया है और 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।
तो यह ‘घी’ बनता कैसे था? (यह जानना बहुत जरूरी है)
यह कोई देसी घी नहीं था... यह था मिलावट का खतरनाक कॉकटेल:
- सस्ता वनस्पति घी
- रिफाइंड तेल
- और घी की ‘नकली खुशबू’ वाला केमिकल एसेंस!
सोचिए, जिस चीज को आप सेहतमंद समझकर खा रहे हैं, वह असल में आपकी सेहत का सबसे बड़ा दुश्मन है। इन मिलावटी चीजों को बनाने में सिर्फ 100-150 रुपये प्रति किलो का खर्च आता था, और ये धोखेबाज इसे असली घी के दाम, यानी 400-500 रुपये प्रति किलो, में बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।
तो आप कैसे बच सकते हैं इस धोखे से?
त्योहारों में मांग बढ़ने के कारण ऐसा गोरखधंधा बहुत बढ़ जाता है। अपनी और अपने परिवार की सेहत बचाने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- भरोसेमंद दुकान से ही खरीदें: हमेशा किसी अच्छी और जानी-पहचानी दुकान से ही घी खरीदें।
- खुला घी लेने से बचें: कोशिश करें कि हमेशा सीलबंद और अच्छी पैकिंग वाला घी ही खरीदें।
- कीमत पर ध्यान दें: अगर कोई दुकानदार आपको ब्रांडेड घी बाजार भाव से बहुत ज्यादा सस्ता दे रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है।
- घर पर करें जांच: असली देसी घी की पहचान है कि वह कमरे के तापमान पर दानेदार रहता है और हथेली पर रखते ही पिघलने लगता है।
यह दिवाली खुशियों और सेहत की है। थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी आपको और आपके परिवार को इस ‘मीठे जहर’ से बचा सकती है।