केरल में भीड़ का वहशीपन चोरी के शक में छत्तीसगढ़ के मजदूर को पीट-पीटकर मार डाला

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News India Live, Digital Desk : पेट की आग इंसान को कहां-कहां नहीं ले जाती। कोई अपना गांव छोड़ता है, कोई अपना घर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले का रामनारायण बघेल भी अपने परिवार का पेट भरने के लिए हजारों किलोमीटर दूर केरल (Kerala) गया था। उसे उम्मीद थी कि वहां मेहनत-मजदूरी करके चार पैसे घर भेजेगा। लेकिन किसे पता था कि वहां से उसकी कमाई नहीं, बल्कि उसकी लाश वापस आएगी।

केरल के मलप्पुरम से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है। वहां भीड़ ने चोरी के शक में इस गरीब मजदूर को इतना पीटा कि उसकी जान चली गई। इस 'मॉब लिंचिंग' की घटना ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है और छत्तीसगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई है।

सीएम विष्णु देव साय ने दिखाया बड़ा दिल

इस दुखद घटना की जानकारी मिलते ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने गहरा दुःख जताया है। वे खुद भी बेहद आहत हैं कि उनके राज्य का एक नागरिक दूसरे राज्य में इस बर्बरता का शिकार हुआ।

सरकार ने पीड़ित परिवार को इस मुश्किल वक्त में अकेला नहीं छोड़ा है। सीएम साय ने घोषणा की है कि रामनारायण बघेल के परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (Ex-gratia) दी जाएगी।
निश्चित रूप से, किसी की जान की कीमत पैसों में नहीं तोली जा सकती, लेकिन एक गरीब परिवार के लिए जिसका कमाने वाला बेटा चला गया हो, यह मदद एक बड़े सहारे का काम करेगी।

शव को सम्मान के साथ लाया जाएगा घर

मुख्यमंत्री ने अफसरों को कड़े निर्देश दिए हैं कि रामनारायण के शव को केरल से ससम्मान उनके पैतृक गांव जांजगीर-चांपा लाने की व्यवस्था की जाए। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि अंतिम संस्कार उनके घर पर ही हो सके।
साथ ही, सीएम ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और उम्मीद जताई है कि केरल सरकार दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करेगी, ताकि फिर किसी गरीब मजदूर के साथ ऐसा न हो।

परिवार का रो-रोकर बुरा हाल

रामनारायण, जो खोरसा गांव का रहने वाला था, सिर्फ डेढ़ महीने पहले ही काम की तलाश में केरल गया था। घर में बूढ़े मां-बाप और पत्नी उसकी राह देख रहे थे। लेकिन भीड़ के 'इंसाफ' ने सबकुछ खत्म कर दिया। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि शक की बिनाह पर किसी की जान ले लेना कहाँ का न्याय है?

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