मध्य-पूर्व में होगा सबसे बड़ा फेरबदल? सऊदी अरब भी शामिल होगा अब्राहम समझौते में, ट्रंप ने दिया बड़ा इशारा
News India Live, Digital Desk : मध्य-पूर्व की राजनीति में एक ऐसे बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है, जो इस पूरे क्षेत्र का समीकरण हमेशा के लिए बदल सकता है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बहुत बड़ा संकेत दिया है कि सऊदी अरब जल्द ही 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) में शामिल हो सकता है। यह इशारा सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के अमेरिका दौरे से ठीक पहले आया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
क्या है 'अब्राहम समझौता'?
'अब्राहम समझौता' 2020 में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान हुई एक ऐतिहासिक शांति पहल है। इस समझौते के तहत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सामान्य किया था। इसके बाद मोरक्को और सूडान भी इसमें शामिल हुए। दशकों से चले आ रहे अरब-इजरायल संघर्ष के बीच यह एक बहुत बड़ा कदम था, जिसका मकसद क्षेत्र में शांति और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
ट्रंप ने क्या दिया बड़ा संकेत?
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में इस बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "जब मैं राष्ट्रपति था, तब हमने अब्राहम समझौते की शुरुआत की थी। कई देश इसमें शामिल होने के लिए तैयार थे। मुझे लगता है कि सऊदी अरब भी बहुत जल्द इसमें शामिल होगा।"
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह 2024 में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इस बयान को उनकी एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर पेश करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है सऊदी अरब का शामिल होना?
सऊदी अरब सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि मुस्लिम जगत का सबसे प्रभावशाली नेता है। मक्का और मदीना के संरक्षक होने के नाते, उसका कोई भी फैसला पूरे इस्लामिक वर्ल्ड पर असर डालता है।
- इजरायल को मान्यता: अगर सऊदी अरब इजरायल के साथ संबंध सामान्य करता है, तो यह इजरायल के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत होगी।
- क्षेत्रीय शांति: इससे ईरान के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा बन सकता है और मध्य-पूर्व में शक्ति का संतुलन बदल सकता है।
- आर्थिक अवसर: सऊदी अरब, इजरायल और अमेरिका के बीच व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।
MBS के अमेरिका दौरे पर टिकी हैं निगाहें
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान जल्द ही अमेरिका का दौरा करने वाले हैं। माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान वह राष्ट्रपति जो बाइडेन और अन्य शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में सुरक्षा, तेल उत्पादन और इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के मुद्दे पर अहम बातचीत हो सकती है। सऊदी अरब अपनी सुरक्षा गारंटी और परमाणु कार्यक्रम के लिए अमेरिका से मदद जैसी कुछ शर्तें रख सकता है।
हालांकि, इस समझौते की राह में फिलिस्तीन का मुद्दा एक बड़ी बाधा है। सऊदी अरब लंबे समय से एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य का समर्थन करता रहा है। अब देखना यह होगा कि इस ऐतिहासिक समझौते के लिए बीच का रास्ता कैसे निकाला जाता है।
अगर यह समझौता हकीकत में बदलता है, तो यह न सिर्फ मध्य-पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीति (Geopolitics) के लिए एक 'गेम-चेंजर' साबित होगा।