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March 14 2026 04:11 am

पुराणों का वो किस्सा जिसे सुनकर आंखें भर आएंगी हनुमान जी और भोलेनाथ का ये रिश्ता है सबसे अलग

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News India Live, Digital Desk : अक्सर हम मंदिरों में देखते हैं कि जहां भगवान शिव होते हैं, वहां आसपास हनुमान जी की मूर्ति भी जरूर होती है। हम यह भी जानते हैं कि हनुमान जी, भगवान शिव के ही 11वें रुद्र अवतार माने जाते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है या सुना है कि खुद हनुमान जी ने भगवान शिव के लिए महाशिवरात्रि (Mahashivratri) का व्रत रखा हो?

सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है कि जो खुद शिव का रूप हैं, वो शिव की पूजा क्यों करेंगे? लेकिन हमारे पुराणों में छिपी यह कथा भक्ति के एक ऐसे स्तर को दिखाती है, जो सचमुच अद्भुत है। आइए, आसान शब्दों में इस कथा का सार समझते हैं।

हरि और हर का अनोखा मिलन

यह बात हम सभी जानते हैं कि हनुमान जी प्रभु श्री राम (भगवान विष्णु के अवतार) के परम भक्त हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि श्री राम, भगवान शिव को अपना आराध्य मानते हैं। आपने रामायण में पढ़ा होगा कि कैसे राम ने रामेश्वरम में शिवजी की पूजा की थी।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी परंपरा को निभाते हुए एक बार हनुमान जी ने महाशिवरात्रि के दिन विशेष उपासना की थी।

कथा क्या कहती है?

एक प्रचलित पौराणिक प्रसंग के मुताबिक, एक बार ऋषियों के बीच यह चर्चा छिड़ गई कि शिवजी का सबसे बड़ा भक्त कौन है? दूसरी तरफ, हनुमान जी यह जानते थे कि प्रभु श्री राम को भगवान शिव अत्यंत प्रिय हैं।

हनुमान जी ने सोचा कि अगर मैं अपने प्रभु (राम) के आराध्य (शिव) को प्रसन्न करूंगा, तो मेरे प्रभु सबसे ज्यादा खुश होंगे। बस, इसी "स्वामी भक्ति" के चलते हनुमान जी ने महाशिवरात्रि के पावन मौके पर पूरे विधि-विधान से भगवान शंकर का व्रत रखा और उनकी आराधना की।

उन्होंने शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया और पूरी रात जागकर शिव नाम का जाप किया। यह घटना यह संदेश देती है कि "हरि" (विष्णु) और "हर" (शिव) दो नहीं, बल्कि एक ही शक्ति के अलग-अलग रूप हैं।

इस कथा से हमें क्या सीख मिलती है?

दोस्तों, आज के दौर में जब लोग धर्म के नाम पर बंट जाते हैं, वहां हनुमान जी की यह कथा बहुत बड़ी सीख देती है। एक 'वैष्णव' (विष्णु भक्त) होते हुए भी उन्होंने 'शैव' (शिव भक्त) परंपरा का मान रखा।

इस महाशिवरात्रि, अगर आप हनुमान जी के भक्त हैं, तो भोलेनाथ की पूजा जरूर करें और अगर आप शिवभक्त हैं, तो हनुमान जी को नमन करना न भूलें। क्योंकि जहां राम हैं, वहां शिव हैं और जहां ये दोनों हैं, वहां हनुमान जी का होना तय है!