सेवा का मंदिर और आधुनिकता का केंद्र, पीएम मोदी के नए दफ्तर सेवा तीर्थ की पहली झलक

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News India Live, Digital Desk : दिल्ली में इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक फैली 'कर्तव्य पथ' की खूबसूरती में अब एक नया मील का पत्थर जुड़ने वाला है। खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका स्टाफ जल्द ही अपने नए दफ्तर में शिफ्ट होने जा रहा है। इसे नाम दिया गया है सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स (Seva Teerth Complex)। जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर है, यहाँ काम को 'पूजा' और शासन को 'सेवा' मानकर चलने की कोशिश की जा रही है।

एक छत के नीचे बड़ी ताक़त
अक्सर हमने देखा है कि सरकारी कामकाज में फाइलें एक ऑफिस से दूसरे ऑफिस जाने में घंटों या दिनों लगा देती हैं। लेकिन सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स को इस तरह से बनाया गया है कि इसमें कैबिनेट सचिवालय (Cabinet Secretariat) और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) जैसे बड़े विभाग एक साथ मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही इसमें 'कर्तव्य भवन' (Kartavya Bhavan) भी शामिल है, जो प्रधानमंत्री कार्यालय के रूप में काम करेगा। इसका मतलब है कि सुरक्षा से जुड़े फैसलों और सरकार के बड़े आदेशों के बीच जो 'गैप' होता था, वह अब ख़त्म हो जाएगा।

आधुनिकता और सुरक्षा का मेल
इस कॉम्प्लेक्स की सबसे बड़ी खूबी है यहाँ की अत्याधुनिक सुरक्षा। पीएम के घर (PM's Residence) से लेकर दफ्तर (PMO) तक एक अंडरग्राउंड टनल यानी गुप्त रास्ता भी तैयार किया गया है। इससे फायदा ये होगा कि पीएम को आने-जाने के लिए बाहर सड़क पर ट्रैफिक नहीं रुकवाना पड़ेगा, जिससे आम जनता को कोई परेशानी न हो और सुरक्षा भी पूरी तरह पुख्ता रहे।

सादगी में छिपी है तकनीक
भले ही यह देखने में बाहर से भव्य है, लेकिन इसे अंदर से बहुत 'इको-फ्रेंडली' और सस्टेनेबल बनाया गया है। बिजली की बचत, प्राकृतिक रोशनी का ज्यादा इस्तेमाल और पेपरलेस वर्क पर जोर देना—इस कॉम्प्लेक्स की पहचान होगी। इसे पूरी तरह 'फ्यूचरिस्टिक' बनाया गया है ताकि आने वाले कई दशकों तक यहाँ से सरकार के काम बिना किसी तकनीकी अड़चन के सुचारू रूप से चल सकें।

कामकाज की नई रफ़्तार
अब तक पीएमओ के विभिन्न विभाग साउथ ब्लॉक और दूसरी बिल्डिंगों में फैले हुए थे। सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स इन सबको समेट कर एक मज़बूत केंद्र बनाएगा। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2026 की शुरुआत के साथ ही यहाँ से अपना काम शुरू करेंगे। यह सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि 'नए भारत' की प्रशासनिक रफ़्तार का नया पता है।

यहाँ बैठकर जब देश के बड़े फैसले लिए जाएंगे, तब शायद ये नाम 'सेवा तीर्थ' लोगों के मन में प्रशासन के प्रति एक नया विश्वास पैदा करने का काम करेगा।