Tech Revolution : फिनलैंड की रेत वाली बैटरी ने दुनिया को चौंकाया बिजली स्टोर करने का सबसे सस्ता फॉर्मूला
News India Live, Digital Desk: अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) जैसे सौर और पवन ऊर्जा के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब धूप नहीं होती या हवा नहीं चलती, तो बिजली की आपूर्ति रुक जाती है। इस समस्या का समाधान फिनलैंड की कंपनी 'नाइट्रिस' (Nightricity) ने खोज निकाला है। उन्होंने दुनिया की पहली व्यावसायिक 'सैंड बैटरी' बनाई है, जो रेत का उपयोग करके हफ्तों तक बिजली स्टोर कर सकती है।
कैसे काम करती है यह 'सतयुगी' तकनीक? (The Working Process)
रेत की बैटरी कोई पारंपरिक रासायनिक बैटरी नहीं है, बल्कि यह एक थर्मल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम है।
ऊर्जा संचयन: सौर पैनलों या पवन चक्कियों से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली का उपयोग रेत को गर्म करने के लिए किया जाता है।
हीट ट्रांसफर: एक बड़े इंसुलेटेड स्टील साइलो (टैंक) में भरी रेत को 600°C से अधिक तापमान तक गर्म किया जाता है।
स्टोरेज: रेत ऊष्मा (Heat) को लंबे समय तक रोक कर रखने में बहुत कुशल होती है। यह महीनों तक इस गर्मी को स्टोर कर सकती है।
उपयोग: जब बिजली की जरूरत होती है, तो इस गर्मी को वापस निकालकर घरों को गर्म करने या टर्बाइन चलाकर फिर से बिजली बनाने में किया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों है यह 'वरदान'? (Importance for India)
भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जहाँ लीथियम की कमी है और सौर ऊर्जा का विशाल भंडार है, यह तकनीक क्रांतिकारी साबित हो सकती है:
सस्ती लागत: लीथियम-आयन बैटरियों की तुलना में रेत की बैटरी की लागत 10 गुना कम है। रेत हर जगह आसानी से उपलब्ध है।
लंबा जीवनकाल: लीथियम बैटरियां 5-10 साल में खराब हो जाती हैं, जबकि रेत की बैटरी की उम्र 30 से 50 साल तक हो सकती है।
पर्यावरण के अनुकूल: इसमें कोई जहरीला केमिकल नहीं होता और पुरानी रेत को फिर से इस्तेमाल या रीसायकल किया जा सकता है।
कृषि क्षेत्र: भारतीय गांवों में कोल्ड स्टोरेज और सिंचाई प्रणालियों के लिए यह एक वरदान साबित हो सकती है।
सैंड बैटरी vs लीथियम-आयन बैटरी
| विशेषता | रेत की बैटरी | लीथियम-आयन बैटरी |
|---|---|---|
| मुख्य सामग्री | साधारण रेत और स्टील | लीथियम, कोबाल्ट, निकेल |
| भंडारण का रूप | ऊष्मा (Heat) | रासायनिक ऊर्जा |
| लागत | बहुत कम (Low Cost) | बहुत अधिक (Expensive) |
| सुरक्षा | विस्फोट का कोई खतरा नहीं | आग लगने का जोखिम |
| उपयोग | बड़े पैमाने पर ग्रिड के लिए | मोबाइल और इलेक्ट्रिक कारों के लिए |