स्वरा भास्कर ने तालिबान को बताया राक्षस महिलाओं को पीटने की छूट वाले नए कानून पर फूटा गुस्सा

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News India Live, Digital Desk: बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) एक बार फिर अपने तल्ख तेवरों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान सरकार द्वारा लागू किए गए नए 'दमनकारी' कानूनों के खिलाफ मोर्चा खोला है। तालिबान ने हाल ही में 90 पन्नों का एक नया दंड संहिता (Penal Code) जारी किया है, जिसमें महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा को एक तरह से कानूनी मान्यता दे दी गई है। स्वरा ने इसे 'घृणित' और 'अमानवीय' करार दिया है।

स्वरा भास्कर का तीखा प्रहार: 'तालिबान मानव जाति के सबसे घिनौने लोग'

स्वरा भास्कर ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट साझा करते हुए अपना गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने लिखा:

"यकीन नहीं होता! सच कहूं तो तालिबान मानव जाति के सबसे घिनौने नमूनों में से हैं—लगातार क्रूर, बर्बर और पूरी तरह से राक्षस। यह मानवता और उस धर्म का अपमान है जिसका वे प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं। बेहद घृणित।"

क्या है तालिबान का नया 'क्रूर' कानून? (The 90-Page Penal Code)

तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा द्वारा हस्ताक्षरित इस नए कानून (De Mahakumu Jazaai Osulnama) में ऐसे प्रावधान हैं जिन्होंने पूरी दुनिया को चौंका दिया है:

घरेलू हिंसा को छूट: पति को अपनी पत्नी को पीटने की अनुमति है, बशर्ते वह डंडे से मारा गया हो और उससे 'गंभीर चोट' (हड्डी टूटना या गहरा घाव) न हुई हो।

सजा का भेदभाव: यदि पत्नी गंभीर रूप से घायल होती है और वह इसे साबित कर देती है, तो भी पति को अधिकतम केवल 15 दिन की जेल होगी।

महिलाओं पर जेल का खतरा: यदि कोई महिला बिना अनुमति के अपने पति का घर छोड़ती है या मायके जाकर रुकती है, तो उसे 3 महीने तक की जेल हो सकती है।

समाज का बंटवारा: कानून ने समाज को चार श्रेणियों—विद्वान, कुलीन, मध्य वर्ग और निम्न वर्ग में बांट दिया है, जहाँ धार्मिक विद्वानों को लगभग कानूनी सुरक्षा (Impunity) प्राप्त है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

स्वरा भास्कर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति 'जेंडर अपार्थाइड' (लिंग आधारित पृथकता) की ओर बढ़ रही है।

समर्थन: कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने स्वरा के रुख की तारीफ की है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के हक में आवाज उठाई।

विरोध: वहीं, कुछ आलोचकों ने स्वरा के पुराने बयानों (जैसे 2021 में तालिबान की तुलना हिंदुत्व से करना) को लेकर उन्हें ट्रोल भी किया है।

अफगानिस्तान में महिलाओं का भविष्य अंधेरे में

पिछले कुछ वर्षों में तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा, पार्क और जिम जाने और यहाँ तक कि सार्वजनिक स्थानों पर उनके बोलने पर भी पाबंदी लगा दी है। अब घरेलू हिंसा को कानूनी रूप से जायज ठहराने की कोशिश ने वहां की महिलाओं के लिए सुरक्षा के आखिरी दरवाजे भी बंद कर दिए हैं।