UGC के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट की सुप्रीम रोक, गिरिराज सिंह बोले- सनातन को बांटने वाली साजिश नाकाम
News India Live, Digital Desk : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' पर सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत के इस फैसले के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए इसे 'सनातन धर्म' और 'सांस्कृतिक एकता' की जीत बताया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यूजीसी के ये नए नियम समाज में दरार पैदा करने वाले थे, जिन्हें माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने समय रहते रोक दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी चिंता: 'समाज में पैदा हो सकता है बंटवारा'
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि इन नियमों की शब्दावली बहुत ही 'अस्पष्ट' है और इसका दुरुपयोग होने की पूरी संभावना है। बेंच ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि यदि इन नियमों में हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इसके परिणाम बेहद घातक हो सकते हैं और यह समाज को गहराई से बांट सकता है। फिलहाल, कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किया है और अगले आदेश तक 2012 के पुराने नियमों को ही प्रभावी रखने का निर्देश दिया है।
गिरिराज सिंह का बड़ा हमला: 'सनातन को बांटने की कोशिश थी'
फैसले के तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया (X) पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, "सनातन को बांटने वाले यूजीसी के नियम पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार। यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है।" उन्होंने आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र पर चलती है और सनातन की अखंड एकता को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्यों हो रहा था इन नियमों का विरोध?
बता दें कि यूजीसी के नए रेगुलेशन 2026 के खिलाफ देश के कई विश्वविद्यालयों, खासकर दिल्ली यूनिवर्सिटी और लखनऊ यूनिवर्सिटी में छात्र उग्र प्रदर्शन कर रहे थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इन नियमों में 'जाति आधारित भेदभाव' की परिभाषा को बहुत संकुचित कर दिया गया था, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभाव का खतरा बढ़ गया था। छात्रों का आरोप था कि इसमें झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी हटा दिया गया था, जो सीधे तौर पर सामाजिक संतुलन के खिलाफ था।
अगली सुनवाई अब 19 मार्च को
सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 19 मार्च 2026 की तारीख तय की है। तब तक यूजीसी के नए नियमों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जानकारों का मानना है कि कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब सरकार और यूजीसी को इन नियमों में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।