सुप्रीम कोर्ट की हाईकोर्ट को दो टूक चुनी हुई सरकार को काम करने से न रोकें, क्या है पूरा मामला?

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News India Live, Digital Desk: अक्सर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तालमेल की खबरें आती हैं, लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट (High Court) के रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हाईकोर्ट को लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट क्यों हुआ नाराज?

मामला सरकार की नीतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए स्टे (Stay) या हस्तक्षेप से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि:

लोकतांत्रिक मर्यादा: एक चुनी हुई सरकार के पास नीतिगत फैसले लेने का अधिकार होता है।

न्यायिक सीमाएं: न्यायपालिका को लक्ष्मण रेखा का ध्यान रखना चाहिए ताकि शासन व्यवस्था ठप न हो।

चेतावनी का लहजा: कोर्ट ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि "हाईकोर्ट चुनी हुई सरकार को पंगु नहीं बना सकता।"

आम जनता पर क्या होगा असर?

जब भी किसी बड़े सरकारी प्रोजेक्ट या नीति पर कोर्ट की तरफ से रोक लगती है, तो उसका सीधा असर विकास कार्यों और जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में नीतिगत फैसलों पर अदालतों द्वारा तुरंत रोक लगाने की प्रवृत्ति कम हो सकती है।

कोर्ट रूम में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान जजों की बेंच ने इस बात पर हैरानी जताई कि कैसे छोटी-छोटी दलीलों के आधार पर बड़े सरकारी आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती देकर काम रुकवा दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल शासन को ठप करने के लिए नहीं होना चाहिए।