Supreme Court on Rajasthan : यह तो सीधे-सीधे महाघोटाला है,- राजस्थान के ज़मीन घोटाले पर क्यों भड़का सुप्रीम कोर्ट?
News India Live, Digital Desk: यह तो खुलेआम लूट है! सीधे-सीधे महाघोटाला!" - जब देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट, ऐसे कड़े शब्द इस्तेमाल करे, तो समझ जाइए कि मामला कितना गंभीर होगा. इस बार सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर है राजस्थान, जहां सरकारी ज़मीनों पर हो रहे अवैध कब्ज़ों को लेकर कोर्ट ने एक बहुत बड़ी और तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ कहा कि यह देखकर हम हैरान हैं कि कैसे राजस्थान आवासन मंडल (Rajasthan Housing Board) के अधिकारियों की मिलीभगत से ही सरकारी ज़मीनों पर कब्ज़ा किया जा रहा है.
यह मामला सिर्फ़ एक ज़मीन के टुकड़े का नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है, जिसकी ज़िम्मेदारी जनता की ज़मीन की रक्षा करना है.
आखिर किस पर भड़का सुप्रीम कोर्ट?
सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें राजस्थान आवासन मंडल द्वारा सालों पहले अधिग्रहित की गई (यानी जनता के काम के लिए ली गई) ज़मीनों पर प्राइवेट लोगों ने अवैध कब्ज़ा कर लिया था. कोर्ट ने पाया कि यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं, बल्कि एक संगठित घोटाला है, जिसमें अधिकारी और भू-माफिया एक-दूसरे से मिले हुए हैं.
कोर्ट ने कहा, "यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि जिस ज़मीन को सरकार ने लोगों के लिए लिया था, उस पर अधिकारियों की मिलीभगत से ही अतिक्रमण हो रहा है. यह तो सीधे-सीधे एक महाघोटाला है."
कैसे चल रहा था यह पूरा खेल?
यह मामला जयपुर की एक ज़मीन से जुड़ा है, जिसे एक पार्क बनाने के लिए रखा गया था. लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत के कारण, उस ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर लिया गया. जिस व्यक्ति को कानूनी तौर पर वह प्लॉट दिया गया था, वह बेचारा सालों तक अपनी ही ज़मीन के लिए भटकता रहा.
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा कि यह सब कुछ आवासन मंडल के अधिकारियों की नाक के नीचे होता रहा. इससे साफ पता चलता ہے कि इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं.
कोर्ट का 24 घंटे का अल्टीमेटम!
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ नाराज़गी जताकर ही बात खत्म नहीं की. उन्होंने एक बहुत बड़ा और सख्त आदेश भी जारी किया.
- कोर्ट ने राजस्थान आवासन मंडल और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) को आदेश दिया कि वे 24 घंटे के अंदर उस ज़मीन पर जाकर कब्ज़ा हटाएं और उसे अपनी सुरक्षा में लें.
- उन्हें एक हफ्ते के अंदर-अंदर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया गया है.
क्या हैं इस फटकार के मायने?
सुप्रीम कोर्ट की इस सख़्ती ने यह साफ़ कर दिया है कि सरकारी ज़मीनों पर हो रही इस दिन-दहाड़े लूट को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह फ़ैसला उन तमाम भ्रष्ट अधिकारियों और भू-माफिया के लिए एक बड़ी चेतावनी है, जो सोचते हैं कि वे कानून को अपनी जेब में रखकर चल सकते हैं. अब देखना यह है कि इस फटकार के बाद राजस्थान में ज़मीनों का यह 'गंदा खेल' रुकता है या नहीं.