Supreme Court on Madhyamik Admit Card : 10वीं का एडमिट कार्ड अब स्टैंडअलोन आईडी नहीं कोर्ट ने तय किए नए नियम

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR) प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों को लेकर उपजे भ्रम को सुप्रीम कोर्ट ने दूर कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि 10वीं का एडमिट कार्ड केवल एक 'पूरक दस्तावेज' (Supplementary Document) के रूप में मान्य होगा।

1. एडमिट कार्ड का उपयोग: कहाँ होगा मान्य?

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, माध्यमिक एडमिट कार्ड का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित दो कार्यों के लिए किया जा सकता है:

जन्मतिथि (DOB) का सत्यापन: चूंकि पश्चिम बंगाल बोर्ड के पास सर्टिफिकेट में अक्सर जन्मतिथि दर्ज नहीं होती, इसलिए एडमिट कार्ड को उम्र साबित करने के लिए 'सप्लीमेंट्री' डॉक्यूमेंट माना जाएगा।

अभिभावक (Parentage) का प्रमाण: मतदाता सूची में माता-पिता के नाम के मिलान (Progeny Linking) के लिए एडमिट कार्ड एक अहम कड़ी साबित होगा, क्योंकि इसमें पिता/माता का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज होता है। [1.1, 5.1]

2. अनिवार्य शर्त: पास सर्टिफिकेट है जरूरी

अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि एडमिट कार्ड का मूल्य तभी है जब उसके साथ 'पास सर्टिफिकेट' भी संलग्न हो।

अकेले मान्य नहीं: केवल एडमिट कार्ड दिखाकर कोई अपनी पहचान या उम्र साबित नहीं कर सकता।

धोखाधड़ी से बचाव: कोर्ट का तर्क है कि एडमिट कार्ड केवल परीक्षा में बैठने का प्रमाण है, जबकि पास सर्टिफिकेट यह सुनिश्चित करता है कि विवरण आधिकारिक तौर पर सत्यापित हैं। [3.4, 5.2]

3. 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' और एडमिट कार्ड की भूमिका

पश्चिम बंगाल में करीब 80 लाख मतदाता दावों और आपत्तियों के घेरे में हैं। इनमें से कई मामले 'तार्किक विसंगति' (Logical Discrepancy) के हैं:

यदि किसी मतदाता और उसके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर 15 साल से कम या 50 साल से अधिक है।

यदि 2002 की मतदाता सूची के साथ नाम या विवरण का मिलान नहीं हो रहा है।

ऐसे मामलों में, न्यायिक अधिकारी एडमिट कार्ड को आधार और पास सर्टिफिकेट के साथ मिलाकर सही पहचान सुनिश्चित करेंगे। [1.5, 3.1]

4. चुनाव अधिकारियों (ERO/AERO) के लिए सख्त निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों को निर्देश दिया है कि:

डेडलाइन: 15 फरवरी 2026 तक प्राप्त सभी भौतिक या इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज, जो अब तक अपलोड नहीं हुए हैं, उन्हें 27 फरवरी शाम 5 बजे तक संबंधित न्यायिक अधिकारियों को सौंपना अनिवार्य है।

सत्यापन: किसी भी योग्य मतदाता का नाम केवल इसलिए नहीं कटना चाहिए कि उसके पास 'स्टैंडअलोन' बर्थ सर्टिफिकेट नहीं है, बशर्ते वह सप्लीमेंट्री डॉक्यूमेंट्स (जैसे एडमिट कार्ड + पास सर्टिफिकेट) पेश कर दे। [1.4, 4.3]