रविवार स्पेशल ,अगर घर में कलेश है या नौकरी में बाधा, तो सूर्याष्टकम कर सकता है चमत्कार

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News India Live, Digital Desk : हम अक्सर कहते हैं कि "Health is Wealth" यानी स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है। हमारे शास्त्रों में भी सूर्य देव (Sun God) को 'आरोग्य' यानी सेहत का देवता माना गया है। वो अकेले ऐसे देवता हैं जो हमें रोज साक्षात दिखाई देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक बहुत ही छोटा और प्यारा सा स्तोत्र है, जिसका पाठ अगर आप रोज सुबह कर लें, तो न सिर्फ़ आपका शरीर निरोग रहेगा, बल्कि मन को भी गजब की शांति मिलेगी?

जी हाँ, हम बात कर रहे हैं "सूर्याष्टकम" (Suryashtakam) की।

क्या है सूर्याष्टकम?

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, 'अष्टकम' का मतलब है आठ पंक्तियां या आठ श्लोक। यह भगवान सूर्य की स्तुति में गाया जाने वाला एक प्राचीन पाठ है। इसकी कहानी बहुत दिलचस्प है। पुराणों में बताया गया है कि भगवान श्री कृष्ण के बेटे सांबा (Samba) को एक बार कुष्ठ रोग (त्वचा संबंधी गंभीर बीमारी) हो गया था। तब उन्होंने इस सूर्याष्टकम के जरिये ही भगवान सूर्य को प्रसन्न किया था और अपने रोग से मुक्ति पाई थी।

तब से लेकर आज तक, यह माना जाता है कि जो कोई भी इसका पाठ सच्चे दिल से करता है, सूर्य देव उसके सारे कष्ट हर लेते हैं।

सूर्याष्टकम पढ़ने के फायदे (Benefits of Reading Suryashtakam)

इसे पढ़ने के फायदे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यह सिर्फ़ धर्म-कर्म नहीं है, बल्कि इसके वैज्ञानिक पहलू भी हैं।

  1. बीमारियों से मुक्ति: सबसे बड़ा फायदा तो सेहत को होता है। कहते हैं कि आँखों की रोशनी बढ़ानी हो या त्वचा (Skin) से जुड़ी कोई परेशानी हो, इसका नियमित पाठ रामबाण की तरह काम करता है।
  2. ग्रहों की शांति: अगर आपकी कुंडली में सूर्य कमजोर है या अन्य ग्रह परेशान कर रहे हैं (जिसे हम 'ग्रह-पीड़ा' कहते हैं), तो रोज सुबह यह पाठ करने से ग्रह शांत हो जाते हैं और जीवन में आ रही रुकावटें दूर होने लगती हैं।
  3. आत्मविश्वास बढ़ता है: सूर्य 'तेज' और 'शक्ति' का प्रतीक हैं। जब आप रोज उनका ध्यान करते हैं, तो आपके अंदर का डर खत्म होता है और कॉन्फिडेंस (आत्मविश्वास) सातवें आसमान पर होता है।

पाठ करने का सही तरीका क्या है?

इसे करना बहुत ही आसान है। आपको किसी बड़े अनुष्ठान की ज़रूरत नहीं है।

  • समय: सुबह का वक्त सबसे अच्छा है। सूर्योदय (Sunrise) के समय नहा-धोकर साफ कपड़े पहन लें।
  • दिशा: पूर्व दिशा (East), जिधर से सूर्य उगते हैं, उधर मुंह करके बैठें या खड़े हो जाएं।
  • अर्घ्य: एक तांबे के लोटे में जल लें, उसमें थोड़ी रोली, अक्षत और लाल फूल डालें और "ॐ सूर्याय नमः" कहते हुए सूर्य देव को जल चढ़ाएं।
  • पाठ: इसके बाद वहीं खड़े होकर या बैठकर हाथ जोड़कर सूर्याष्टकम का पाठ करें। इसकी शुरुआत "आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर" से होती है।

अगर आपको संस्कृत पढ़ने में दिक्कत होती है, तो आप इसका हिंदी अनुवाद भी पढ़ सकते हैं या सिर्फ़ सुन भी सकते हैं। भाव महत्वपूर्ण है, भाषा नहीं।

रविवार का दिन है खास

वैसे तो इसे रोज़ पढ़ना चाहिए, लेकिन अगर रोज़ समय नहीं मिलता तो कम से कम रविवार (Sunday) के दिन इसे ज़रूर अपनी दिनचर्या में शामिल करें। विश्वास मानिए, सुबह के वो 5 मिनट आपका पूरा दिन, और धीरे-धीरे पूरी ज़िन्दगी बदल सकते हैं।

तो कल सुबह अलार्म बजने के बाद बिस्तर पर पड़े रहने के बजाय, उगते सूरज का स्वागत इस पाठ से करके देखिये, फर्क आपको खुद महसूस होगा!