Makar Sankranti 2026 : क्या 14 या 15 को मनाएं त्यौहार? जानिए शुभ मुहूर्त और स्नान का सही समय
News India Live, Digital Desk : नए साल का पहला बड़ा त्यौहार यानी मकर संक्रांति (Makar Sankranti) आ गया है। इस दिन का हम सबको बेसब्री से इंतज़ार रहता है किसी को पतंग उड़ाने के लिए, तो किसी को गरमा-गरम खिचड़ी और तिल के लड्डू खाने के लिए। लेकिन मौज-मस्ती से अलग, इस त्यौहार का हमारे धर्म और सेहत, दोनों के लिए बहुत गहरा मतलब है।
आज हम बात करेंगे 2026 की मकर संक्रांति के बारे में कि आपको कब पूजा करनी है, नहाने (स्नान) का सही समय क्या है और दान क्या करना चाहिए ताकि साल भर घर में खुशियां बनी रहें।
क्यों मनाते हैं यह त्यौहार?
सबसे पहले तो आसान भाषा में यह समझिए कि आज हो क्या रहा है। आज सूर्य भगवान अपने बेटे शनि देव के घर यानी 'मकर राशि' (Capricorn) में प्रवेश कर रहे हैं। इसीलिए इसे मकर संक्रांति कहते हैं। माना जाता है कि आज से ठंडी थोड़ी कम होनी शुरू हो जाती है और दिन बड़े होने लगते हैं। साथ ही, अब शादी-विवाह जैसे शुभ काम फिर से शुरू हो जाएंगे क्योंकि खरमास खत्म हो रहा है।
पूजा का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
अक्सर संक्रांति की तारीख को लेकर उलझन रहती है—14 तारीख या 15 तारीख? पंचांग के हिसाब से, इस साल 2026 में संक्रांति का पुण्य काल 14 जनवरी, बुधवार को है।
- पुण्य काल का समय: सुबह सूर्योदय के साथ ही पुण्य काल शुरू हो जाएगा।
- महापुण्य काल: यह वो खास समय होता है जब दान-पुण्य का फल कई गुना ज्यादा मिलता है। कोशिश करें कि आप सुबह-सुबह, सूरज उगने के बाद स्नान और दान-पुण्य कर लें।
स्नान-दान: क्यों ठंडे पानी से नहाना है ज़रूरी?
आप सोच रहे होंगे कि इतनी कड़ाके की ठंड में नदी में या ठंडे पानी से नहाने का क्या लॉजिक है? असल में, हमारे शास्त्रों में इस दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व है। अगर गंगा जी पास नहीं हैं, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिला लें।
तिल का उबटन लगाना और तिल वाले पानी से नहाना शरीर के लिए बहुत अच्छा होता है, क्योंकि वैज्ञानिक तौर पर तिल शरीर को गर्मी देता है। तो एक दिन की ठंड बर्दाश्त कर लीजिए, फल बहुत अच्छा मिलेगा।
पूजा की एकदम आसान विधि
पूजा के लिए आपको कोई बहुत तामझाम नहीं करना है:
- सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ कपड़े (हो सके तो पीले या लाल) पहनें।
- तांबे के लोटे में जल लें, उसमें लाल फूल, रोली, अक्षत (चावल) और काले तिल डालें।
- अब पूर्व दिशा (East) की तरफ मुंह करके भगवान सूर्य को "ॐ सूर्याय नमः" बोलते हुए जल चढ़ाएं (अर्घ्य दें)।
- इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं और अपने कुल देवी-देवता को याद करें।
दान क्या करें? (What to Donate)
मकर संक्रांति को 'दान का पर्व' भी कहते हैं। पुरानी कहावत है—इस दिन आप जो दान करेंगे, वो आपको सौ गुना होकर वापस मिलेगा।
- तिल और गुड़: ये तो सबसे ज़रूरी है। तिल का दान शनि देव को खुश करता है और गुड़ सूर्य देव को।
- खिचड़ी: इसीलिए इस त्यौहार को कई जगह "खिचड़ी" भी कहते हैं। चावल, उड़द की काली दाल, नमक और घी का दान किसी ब्राह्मण या गरीब को ज़रूर करें।
- कंबल: ठंड का मौसम है, तो किसी जरूरतमंद को ऊनी कपड़े या कंबल देना सबसे बड़ा पुण्य का काम है।
खाने में क्या खास है?
पूजा के बाद दही-चूड़ा और खिचड़ी खाने का रिवाज है। यूपी और बिहार में तो इसे शगुन माना जाता है। तो बस, अपने परिवार के साथ बैठकर खिचड़ी का आनंद लीजिये, तिल के लड्डू खाइये और अगर मौसम साथ दे, तो छत पर जाकर पेंच लड़ाइये!