Sunday Remedies : रोग, शत्रु और दुर्भाग्य का होगा नाश, हर रविवार करें इस चमत्कारी सूर्य कवच का पाठ

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News India Live, Digital Desk : Sunday Remedies :  जीवन में जब चारों तरफ से मुश्किलें घेर लें, सेहत साथ न दे, दुश्मन परेशान करने लगें और बने-बनाए काम बिगड़ने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि आपकी ऊर्जा में कहीं न कहीं कमी है। सनातन धर्म में, सूर्य को ऊर्जा, स्वास्थ्य, मान-सम्मान और जीवन का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है। वह केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष देवता हैं जिन्हें हम हर दिन देख सकते हैं।

शास्त्रों में भगवान सूर्य देव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा पाने के लिए कई मंत्रों और स्तोत्रों का वर्णन है, लेकिन उन सब में 'सूर्य कवच' को सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली माना गया है। 'कवच' का अर्थ होता है 'रक्षा करने वाला घेरा'। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन और पूरी श्रद्धा से इस कवच का पाठ करता है, सूर्य देव स्वयं उसकी सभी संकटों से रक्षा करते हैं।

क्या है सूर्य कवच और इसके फायदे?

'श्री सूर्य कवच' का वर्णन याज्ञवल्क्य संहिता में मिलता है। यह एक ऐसा चमत्कारी स्तोत्र है जिसमें भक्त, भगवान सूर्य से अपने शरीर के हर अंग की रक्षा करने की प्रार्थना करता है। यह सिर्फ बाहरी दुश्मनों से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी रोगों और नकारात्मक विचारों से भी हमारी रक्षा करता है।

सूर्य कवच के पाठ से मिलने वाले मुख्य लाभ:

  • लंबी और निरोगी काया: जो व्यक्ति लंबी बीमारी से परेशान है, उसे इसके पाठ से स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
  • शत्रुओं पर विजय: अगर आपके शत्रु आप पर हावी हो रहे हैं या आपको बेवजह परेशान कर रहे हैं, तो यह कवच आपके लिए एक अमोघ अस्त्र की तरह काम करता है।
  • मान-सम्मान में वृद्धि: समाज में प्रतिष्ठा, सरकारी कार्यों में सफलता और करियर में तरक्की के लिए इसका पाठ बहुत शुभ माना गया है।
  • दरिद्रता और दुखों का नाश: यह कवच गरीबी और सभी प्रकार के दुखों को दूर कर जीवन में सुख-समृद्धि लाता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से बचाव: यह आपके चारों ओर एक ऐसा सुरक्षा घेरा बना देता है, जिससे कोई भी बुरी नजर या नकारात्मक शक्ति आप पर असर नहीं कर पाती।

कैसे करें सूर्य कवच का पाठ? (Surya Kavach Path Vidhi)

  • सूर्य कवच का पाठ करने के लिए रविवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है।
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ, विशेषकर लाल या नारंगी रंग के वस्त्र पहनें।
  • अपने घर के मंदिर में सूर्य देव की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। अगर नहीं है तो मन में ही उनका ध्यान करें।
  • सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल (अर्घ्य) अर्पित करें। जल में रोली, अक्षत और लाल फूल डालना बहुत शुभ होता है।
  • अब शांत मन से और पूरी श्रद्धा के साथ सूर्य कवच का पाठ शुरू करें।

श्री सूर्य कवच (अर्थ सहित)

मूल श्लोक:
श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।
शरीरारोग्यदं दिव्यं सर्व सौभाग्य दायकम् ।।

अर्थ:
हे मुनिश्रेष्ठ! आप सूर्यदेव के इस शुभ कवच को सुनें, जो शरीर को आरोग्य प्रदान करने वाला, दिव्य और संपूर्ण सौभाग्य को देने वाला है।

मूल श्लोक:
देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।
ध्यात्वा सहस्त्रकिरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत्।।

अर्थ:
चमकते हुए मुकुट और झिलमिलाते मकर-कुंडल धारण किए हुए, हजार किरणों वाले सूर्यदेव का ध्यान करके इस स्तोत्र का पाठ आरंभ करें।

मूल श्लोक:
शिरो मे भास्कर: पातु ललाटं मेSमित द्युति:।
नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर:।।

अर्थ:
मेरे सिर की रक्षा भास्कर करें, मेरे मस्तक की रक्षा अमित द्युति करें। मेरी आंखों की रक्षा दिनमणि और कानों की रक्षा वासरेश्वर करें।

मूल श्लोक:
घ्राणं धर्म धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।
जिह्वां मे मानद: पातु कण्ठं मे सुर वन्दित:।।

अर्थ:
मेरी नाक की रक्षा धर्म धृणि, मेरे मुख की रक्षा वेद वाहन करें। मेरी जीभ की रक्षा मानद और मेरे गले की रक्षा देवों द्वारा पूजे जाने वाले सूर्य देव करें।

मूल श्लोक:
स्कन्धौ प्रभाकर: पातु वक्ष: पातु जनप्रिय:।
पातु पादौ द्वादशात्मा सर्वागं सकलेश्वर:।।

अर्थ:
मेरे कंधों की रक्षा प्रभाकर, मेरे सीने की रक्षा जनप्रिय करें। मेरे पैरों की रक्षा द्वादशात्मा और मेरे सभी अंगों की रक्षा सकलेश्वर (संपूर्ण जगत के ईश्वर) करें।

मूल श्लोक:
सूर्यरक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।
दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय:।।

अर्थ:
सूर्यदेव का यह रक्षा प्रदान करने वाला स्तोत्र जो भी भोजपत्र पर लिखकर अपने हाथ में धारण करता है, सभी सिद्धियां उसके अधीन हो जाती हैं।

मूल श्लोक:
सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योSधीते स्वस्थ मानस:।
स रोगमुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विन्दति।।

अर्थ:
जो व्यक्ति अच्छी तरह स्नान करके, स्वस्थ और शांत मन से इस कवच का पाठ करता है या इसे सुनता है, वह सभी रोगों से मुक्त होकर लंबी आयु, सुख और स्वास्थ्य को प्राप्त करता है।