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April 21 2026 01:30 am

बिहार में कृषि विभाग का कड़ा फैसला 22 जिलों में थमी किसानों की ट्रेनिंग, करोड़ों का बजट वापस मांगा

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News India Live, Digital Desk: बिहार के कृषि क्षेत्र से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार के कृषि विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सूबे के 22 जिलों में चल रहे किसानों और युवाओं के कौशल विकास प्रशिक्षण (Skill Development Training) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। विभाग ने इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए आवंटित करोड़ों रुपये का फंड भी वापस मांग लिया है। इस निर्णय से उन हजारों किसानों और युवक-युवतियों के सामने संकट खड़ा हो गया है जो आधुनिक खेती और स्वरोजगार के गुर सीख रहे थे।

क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्रवाई के पीछे बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर और उससे जुड़े 22 कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बताया जा रहा है कि इन केंद्रों को किसानों के कौशल विकास के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया था, लेकिन कई जिलों में प्रशिक्षण की रफ्तार काफी धीमी थी या कागजों पर खानापूर्ति की जा रही थी। विभाग द्वारा बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद, समय सीमा के भीतर निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं किया गया, जिसके बाद मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाते हुए बजट वापस लेने का आदेश जारी कर दिया।

इन जिलों पर गिरा गाज

जिन 22 जिलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम ठप हुए हैं, उनमें भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, जमुई, शेखपुरा, बेगूसराय, खगड़िया जैसे महत्वपूर्ण कृषि प्रधान जिले शामिल हैं। इन जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों को अब तक खर्च न की गई राशि को सरकारी खजाने में वापस जमा करने का निर्देश दिया गया है। विभाग की इस कार्रवाई से कृषि अधिकारियों और विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।

किसानों और युवाओं को होगा बड़ा नुकसान

कृषि विभाग के इस निर्णय का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है।

मशरूम और मधुमक्खी पालन: इन प्रशिक्षणों के जरिए युवाओं को मशरूम उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे लाभकारी व्यवसायों से जोड़ा जा रहा था।

आधुनिक कृषि यंत्र: किसानों को नए कृषि यंत्रों के इस्तेमाल और रख-रखाव की ट्रेनिंग दी जानी थी, जो अब अधर में लटक गई है।

स्वरोजगार: कौशल विकास योजना के तहत मिलने वाला सर्टिफिकेट युवाओं को बैंक से लोन लेने में मदद करता था, जो अब रुक जाएगा।

भविष्य की रणनीति और सुधार

कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह कदम व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। फंड की वापसी के बाद अब नए सिरे से उन केंद्रों को बजट आवंटित किया जाएगा जो काम करने में सक्षम हैं। साथ ही, अब डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसानों की ट्रेनिंग वास्तव में जमीन पर हो रही है या नहीं। सरकार का लक्ष्य है कि बजट का एक-एक पैसा किसानों के कल्याण पर ही खर्च हो।