तीन देशों की कहानी और तीन पहचान वाली एक बेगम,आखिर भारत से क्या था खालिदा जिया का असली नाता?
News India Live, Digital Desk: आज जब हम खालिदा जिया का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में बांग्लादेश की एक कद्दावर और थोड़ी सख्त राजनेता की छवि उभरती है। कूटनीतिक गलियारों में उन्हें भारत से दूरी रखने वाले नेता के तौर पर देखा गया, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि खालिदा जिया का वजूद भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश इन तीनों मुल्कों के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है।
वो बचपन, जो आज के पश्चिम बंगाल में बीता
बहुत कम लोग इस बात पर गौर करते हैं कि खालिदा जिया का जन्म 1945 में अखंड भारत (British India) के जलपाईगुड़ी में हुआ था। यह आज के समय में भारत के पश्चिम बंगाल का हिस्सा है। उनका परिवार मूल रूप से अविभाजित भारत के उस दौर की पैदाइश है, जब सरहदों पर कँटीली तारें नहीं थीं। उनका बचपन उन्हीं पहाड़ियों और हरियाली के बीच बीता, जिसे हम आज अपना कहते हैं।
एक सफर, तीन मुल्क
खालिदा जिया के जीवन को अगर हम एक नक्शे पर देखें, तो वह बड़ा ही दिलचस्प है:
- भारत (India): जहाँ उन्होंने अपनी आँखें खोलीं और अपना बचपन बिताया।
- पाकिस्तान (Pakistan): 1947 के बंटवारे के बाद जब वे अपने परिवार के साथ दिनाजपुर (पूर्वी पाकिस्तान) चली गईं। उस दौर में वह पाकिस्तान की नागरिक रहीं और वहीं के साये में बड़ी हुईं। उनके पति जियाउर रहमान भी उस वक्त पाकिस्तान सेना के बड़े अधिकारी थे।
- बांग्लादेश (Bangladesh): 1971 की जंग के बाद जब एक नया देश बना, तो वह वहां की नागरिक बनीं और आगे चलकर उसी देश की बागडोर संभाली।
इतिहास की विडंबना: भारत से जुड़ाव फिर भी दूरी क्यों?
अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि जो शख्स भारत की मिट्टी में पैदा हुआ, वह राजनीति में आकर भारत से इतना कड़वा क्यों हो गया? असल में, खालिदा जिया की राजनीति 'राष्ट्रवाद' के उस कट्टर रास्ते पर चली, जिसमें भारत के साथ जरूरत से ज्यादा नजदीकी को अपनी स्वायत्तता के लिए खतरा माना जाता था। उन्होंने हमेशा अपनी छवि एक 'देशभक्त बांग्लादेशी' की बनाई, जिसका फायदा उन्हें अपनी पार्टी (BNP) को मजबूत करने में मिला।
यही वजह है कि उनकी राजनीतिक विरासत में भारत के साथ रिश्ते हमेशा 'तनाव' वाले रहे, भले ही उनके निजी इतिहास की जड़ें भारत में ही क्यों न हों।
एक याद जो हमेशा रहेगी
खालिदा जिया के निधन के बाद यह चर्चा दोबारा गरम है कि कैसे दक्षिण एशिया के ये नेता खुद में पूरे उपमहाद्वीप का इतिहास समेटे हुए थे। एक हाउसवाइफ से लेकर तीन देशों की सियासी यात्रा की गवाह रहने तक, उनका व्यक्तित्व भारत-बांग्लादेश की साझा संस्कृति का भी हिस्सा रहा है। वह जलपाईगुड़ी की वो बेटी थीं, जिसकी किस्मत ने उसे पड़ोसी मुल्क का सुल्तान बना दिया।