वियान मुल्डर को आउट कर बने 450 टेस्ट विकेट लेने वाले दुनिया के पहले बाएं हाथ के गेंदबाज, दिग्गज क्लब में एंट्री

वियान मुल्डर को आउट कर बने 450 टेस्ट विकेट लेने वाले दुनिया के पहले बाएं हाथ के गेंदबाज, दिग्गज क्लब में एंट्री

विश्व क्रिकेट के इतिहास में अपनी तूफानी गति, तीखी स्विंग और घातक यॉर्कर के लिए विख्यात ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क ने टेस्ट क्रिकेट के पटल पर एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गकेबरहा (पोर्ट एलिजाबेथ) में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन स्टार्क ने प्रोटियाज बल्लेबाज वियान मुल्डर का कीमती विकेट चटकाते ही टेस्ट क्रिकेट में अपने 450 विकेट पूरे कर लिए। इसी ऐतिहासिक सफलता के साथ मिशेल स्टार्क 147 वर्षों के टेस्ट क्रिकेट इतिहास में 450 या उससे अधिक विकेट हासिल करने वाले दुनिया के पहले बाएं हाथ के गेंदबाज (Left-Arm Bowler) बन गए हैं। उनसे पहले वसीम अकरम और चमिंडा वास जैसे दिग्गज बाएं हाथ के तेज गेंदबाज भी इस आंकड़े से पहले ही रुक गए थे। इसके साथ ही स्टार्क ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट में 450 का जादुई आंकड़ा पार करने वाले चौथे सबसे सफल गेंदबाज बन गए हैं, जिससे उनका नाम क्रिकेट के महानतम महारथियों की श्रेणी में हमेशा के लिए अमर हो गया है।

डीआरएस के ड्रामे के बाद मिली 450वीं सफलता, मुल्डर को गति और उछाल से छकाया

यह ऐतिहासिक क्षण गकेबरहा टेस्ट मैच के तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीका की पहली पारी के 50वें ओवर की अंतिम गेंद पर आया। गेंदबाजी छोर पर मौजूद मिशेल स्टार्क ने अपनी गति में विविधता लाते हुए एक बेहद तीखी शॉर्ट-पिच गेंद फेंकी जो अप्रत्याशित उछाल के साथ सीधे 28 वर्षीय वियान मुल्डर के शरीर की ओर आई। मुल्डर गेंद की अतिरिक्त गति और लाइन से पूरी तरह असहज दिखे और अपने शरीर को बचाने के प्रयास में बल्ला अड़ा बैठे। गेंद उनके दस्ताने का बाहरी किनारा छूती हुई हेलमेट पर लगी और पहली स्लिप में तैनात फील्डर मैट रेनशॉ के सुरक्षित हाथों में समा गई। ऑस्ट्रेलिया की जोरदार अपील के बावजूद मैदानी अंपायर ने इसे नॉट-आउट करार दिया। कप्तान पैट कमिंस और स्टार्क ने बिना समय गंवाए तत्काल डीआरएस (DRS) का सहारा लिया। टीवी रिप्ले और अल्ट्रा-एज तकनीक में साफ दिखाई दिया कि गेंद ने बल्ले के दस्ताने को स्पष्ट रूप से स्पर्श किया था। तीसरे अंपायर ने मैदानी फैसला बदलते हुए मुल्डर को आउट घोषित किया और इसके साथ ही पूरा ऑस्ट्रेलियाई खेमा स्टार्क की इस महा-उपलब्धि के जश्न में डूब गया।

ऑस्ट्रेलिया के एलीट क्लब में शामिल हुए स्टार्क: वॉर्न, मैकग्राथ और लियोन के साथ साझा किया मंच

450 टेस्ट विकेटों के जादुई मील के पत्थर तक पहुंचते ही मिशेल स्टार्क ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास के सबसे विशिष्ट और एलीट क्लब का हिस्सा बन गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के समृद्ध टेस्ट इतिहास में अब तक केवल चार ही गेंदबाज इस मुकाम को छू पाए हैं। इस प्रतिष्ठित सर्वकालिक सूची में दिवंगत लेग स्पिन के जादूगर शेन वॉर्न 708 विकेटों के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि महान तेज गेंदबाज ग्लेन मैकग्राथ 563 टेस्ट विकेटों के साथ दूसरे पायदान पर काबिज हैं। वहीं मौजूदा दौर के दिग्गज ऑफ स्पिनर नाथन लियोन 530 से अधिक विकेट लेकर तीसरे स्थान पर हैं और अब 450 विकेट पूरे करके मिशेल स्टार्क चौथे पायदान पर मजबूती से स्थापित हो गए हैं। बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों में वसीम अकरम के 414 टेस्ट विकेटों का रिकॉर्ड स्टार्क पहले ही तोड़ चुके थे, और अब 450 का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर उन्होंने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जिसे तोड़ना किसी भी युवा बाएं हाथ के गेंदबाज के लिए एक हिमालयी चुनौती साबित होगा।

स्कॉट बोलैंड का तूफानी 'पंजा': शीर्ष क्रम को ध्वस्त कर झटके 5 बड़े विकेट

इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी का दूसरा सबसे बड़ा आकर्षण तेज गेंदबाज स्कॉट बोलैंड रहे, जिन्होंने एक बार फिर अपनी सटीक लाइन और लेंथ से कहर बरपाते हुए दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेल दिया। इस मैच में नाथन लियोन की जगह प्लेइंग इलेवन में शामिल किए गए बोलैंड ने नई गेंद और पुरानी गेंद दोनों से ऐसी कसी हुई गेंदबाजी की जिसका दक्षिण अफ्रीकी शीर्ष क्रम के पास कोई जवाब नहीं था। बोलैंड ने प्रोटियाज टीम की कमर तोड़ते हुए अपने स्पेल में पांच विकेट (Five-Wicket Haul) चटकाए। उन्होंने सलामी बल्लेबाज एडेन मार्कराम, मार्क्वेस एकरमैन, डेविड बेडिंगहैम, रयान रिकेल्टन और अंत में खतरनाक साबित हो रहे मार्को जानसेन को पवेलियन का रास्ता दिखाया। बोलैंड के इस धमाकेदार प्रदर्शन ने एक बार फिर क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच यह गंभीर बहस छेड़ दी है कि क्या उन्हें ऑस्ट्रेलियाई टेस्ट एकादश में नियमित रूप से स्थायी जगह दी जानी चाहिए।

40 पर 4 विकेट गंवाने के बाद बावुमा और जानसेन की जांबाज वापसी: 132 रनों की साझेदारी से संभाली पारी

एक समय ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों की आग उगलती गेंदों के सामने दक्षिण अफ्रीका का शीर्ष क्रम ताश के पत्तों की तरह बिखर गया था और टीम ने मात्र 40 रन के स्कोर पर अपने 4 प्रमुख विकेट गंवा दिए थे। सीरीज दांव पर लगी होने के कारण मेजबान टीम भारी दबाव में आ गई थी। ऐसे नाजुक और मुश्किल समय में दक्षिण अफ्रीकी कप्तान टेम्बा बावुमा ने मोर्चे से अगुवाई की। बावुमा ने न केवल एक छोर मजबूती से थामे रखा बल्कि संकट के बीच धैर्य और कौशल का परिचय देते हुए एक शानदार शतक जड़ दिया। दूसरे छोर पर लंबे कद के युवा ऑलराउंडर मार्को जानसेन ने आक्रामक काउंटर-अटैकिंग बल्लेबाजी का मुजाहिरा किया। जानसेन ने 85 के जबर्दस्त स्ट्राइक रेट से खेलते हुए महज 100 गेंदों में 85 रनों की तूफानी पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों के बीच छठे विकेट के लिए हुई 132 रनों की बहुमूल्य साझेदारी ने दक्षिण अफ्रीका को गहरे संकट से बाहर निकालते हुए मैच में जोरदार वापसी करा दी। मेजबान टीम अब 300 रनों के पार पहुंचकर दूसरी पारी में अपनी बढ़त को मजबूत करने की उम्मीद कर रही है ताकि ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों पर दबाव बनाया जा सके।