जब नंबर-11 के बल्लेबाज ने भारतीय गेंदबाजों की उड़ाई नींद
क्रिकेट के मैदान पर कई बार ऐसे अद्भुत और अविश्वसनीय पल देखने को मिलते हैं जो खेल प्रेमियों के जेहन में हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। आम तौर पर किसी भी क्रिकेट मैच में जब बल्लेबाजी करने के लिए नंबर-11 (आखिरी नंबर) का बल्लेबाज क्रीज पर उतरता है, तो विरोधी टीम के गेंदबाज और कप्तान यही सोचते हैं कि बस दो-तीन गेंदों में खेल खत्म करके पूरी टीम को पवेलियन भेज दिया जाए। हालांकि, भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच खेले गए मुकाबलों समेत अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे अनोखे मौके आए हैं जब आखिरी पायदान पर उतरने वाले इन नंबर-11 के बल्लेबाजों ने दुनिया के दिग्गज गेंदबाजों की सारी रणनीतियों पर पानी फेर दिया। इन पूंछ के बल्लेबाजों (Tailenders) ने न केवल कई-कई ओवर क्रीज पर डटकर टिके रहना सिखाया, बल्कि अपनी टीम के स्कोरबोर्ड पर इतने बहुमूल्य रन जोड़ दिए कि बड़े-बड़े स्पेशलिस्ट बल्लेबाज भी देखकर हैरान रह गए। आइए आज आपको उन पांच ऐतिहासिक और सबसे बड़ी पारियों के बारे में बताते हैं जब नंबर-11 के बल्लेबाजों ने भारत या अन्य मजबूत टीमों के खिलाफ दीवार बनकर अपनी टीम की लाज बचाई।
#1. जब आखिरी विकेट के लिए लंबी साझेदारी ने बदल दिया मैच का पूरा रुख
क्रिकेट के खेल में निचले क्रम के बल्लेबाजों का मुख्य काम आमतौर पर अपने मुख्य बल्लेबाजों का साथ देना या बमुश्किल कुछ गेंदें खेलना होता है, लेकिन जब कोई नंबर-11 का खिलाड़ी टेस्ट या वनडे मैच में क्रीज पर उतरकर अपने डिफेंस और जज्बे से गेंदबाजों को थका देता है, तो मुकाबला पूरी तरह रोमांचक हो जाता है। भारत और कीवी टीम के बीच कई बार ऐसा देखने को मिला है जब शुरुआती और मध्यक्रम के धराशायी होने के बाद नंबर-11 के खिलाड़ी ने टिककर खेलना शुरू किया और स्कोर को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचा दिया। क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक्स में ऐसे कई किस्से दर्ज हैं जहां आखिरी नंबर के बल्लेबाज ने अपनी टीम के लिए जीवनदान का काम किया और विपक्षी गेंदबाजों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दीं।
#1. टेस्ट और वनडे में नंबर-11 के बल्लेबाजों की वे 5 सबसे बड़ी पारियां जो इतिहास में हुईं अमर
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लंबे इतिहास में नंबर-11 के स्थान पर आकर सबसे बड़ी और यादगार पारियां खेलने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों का जिक्र हमेशा होता है। इन पांच ऐतिहासिक पारियों में खिलाड़ियों ने अपनी अद्भुत एकाग्रता और संयम का परिचय देते हुए साबित कर दिया कि क्रिकेट में कोई भी खिलाड़ी कमजोर नहीं होता। चाहे वह वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड या न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली गई पारियां हों, इन बल्लेबाजों ने टेस्ट क्रिकेट में कई घंटे क्रीज पर बिताकर अर्धशतक या उससे अधिक रन बनाए। जब-जब विरोधी गेंदबाजों ने यह मान लिया कि अब विकेट आसानी से मिल जाएगा, तब-तब इन बल्लेबाजों ने रक्षात्मक खेल और कुछ बेहतरीन शॉट्स के जरिए मैच का नक्शा ही बदल डाला।
#1. भारतीय गेंदबाजों के सामने जब सिरदर्द बन गए टेलेंडर्स: रणनीति पर उठे सवाल
अक्सर यह देखने को मिला है कि भारतीय गेंदबाजी आक्रमण जब विपक्षी टीम के शीर्ष और मध्य क्रम को सस्ते में समेट देता है, तो टीम के गेंदबाज और क्षेत्ररक्षक थोड़ा ढीले पड़ जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर जब नंबर-11 का बल्लेबाज मैदान पर टिक जाता है, तो भारतीय कप्तान को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। तेज गेंदबाजों की शॉर्टपिच गेंदों को छोड़ना और स्पिनरों की फिरकी को पैड से रोकना इन बल्लेबाजों की रणनीति का मुख्य हिस्सा होता है। क्रिकेट पंडितों का मानना है कि भारतीय टीम को कई बार निचले क्रम के बल्लेबाजों के खिलाफ गेंदबाजी करते समय अधिक अनुशासन और आक्रामकता दिखाने की जरूरत होती है, ताकि वे आसानी से रन न बना सकें।
#1. आधुनिक क्रिकेट में निचले क्रम के बल्लेबाजों की बढ़ती महत्ता और ट्रेनिंग
आज के आधुनिक क्रिकेट युग में, जहां टी-20 और वनडे का बोलबाला है, हर टीम अपने निचले क्रम के और नंबर-11 के गेंदबाजों को भी बल्लेबाजी का विशेष अभ्यास कराती है। अब कोई भी टीम यह नहीं चाहती कि उनके आखिरी के दो खिलाड़ी बिना रन बनाए आउट हो जाएं। आधुनिक कोच नेट सेशन के दौरान इन खिलाड़ियों को थ्रोडाउन और विशेष कोचिंग देकर उनके डिफेंस को मजबूत बनाते हैं। भारत और न्यूजीलैंड जैसी शीर्ष टीमों के बीच होने वाले आगामी मुकाबलों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया नंबर-11 बल्लेबाज फिर से इतिहास रचता है या फिर गेंदबाज उन पर पूरी तरह हावी रहते हैं।