ये क्या बात हुई?': 4 दिन बल्ला नहीं चला तो बीच सीरीज टीम से बाहर
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) और उसके अजीबोगरीब फैसलों का नाता पुराना रहा है, लेकिन इस बार चयनकर्ताओं ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे क्रिकेट जगत को हैरानी में डाल दिया है। पाकिस्तान के युवा और प्रतिभाशाली सलामी बल्लेबाज सैम अयूब को महज 4 दिन बल्ला न चलने की सजा देते हुए बीच सीरीज ही टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अपने बेबाक और आक्रामक बल्लेबाजी अंदाज के लिए जाने जाने वाले सैम अयूब को पाकिस्तान क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा था, लेकिन लगातार दबाव और चयनकर्ताओं की अस्थिर नीतियों के कारण उनके करियर पर ग्रहण लगता दिख रहा है। न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी अहम मुकाबलों से ठीक पहले सैम अयूब को ड्रॉप किए जाने के इस फैसले पर फैंस, पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा साफ देखा जा सकता है, जहाँ लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर 2-3 पारियों में असफल रहने पर किसी युवा खिलाड़ी के साथ ऐसा बर्ताव कैसे किया जा सकता है।
लगातार चयनकर्ताओं के निशाने पर युवा खिलाड़ी: सैम अयूब के साथ हुए इस फैसले की असली वजह क्या है?
पाकिस्तान क्रिकेट में जिस तरह से खिलाड़ियों को अंदर-बाहर किया जाता है, उसने एक बार फिर टीम प्रबंधन और पीसीबी की चयन नीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सैम अयूब को हाल ही में खेली गई सीरीज के दौरान ओपनिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन वे कुछ पारियों में उम्मीद के मुताबिक बड़ा स्कोर बनाने में नाकाम रहे। महज 4 दिनों के भीतर खेले गए दो मुकाबलों में सस्ते में आउट होते ही चयनकर्ताओं ने बिना कोई दूसरा मौका दिए उन्हें बीच सीरीज स्क्वॉड से बाहर कर दिया। सूत्रों के अनुसार, पीसीबी का नया चयन बोर्ड सीनियर खिलाड़ियों की वापसी और फॉर्म में चल रहे अन्य घरेलू खिलाड़ियों को शामिल करने के दबाव में था। हालांकि, किसी युवा खिलाड़ी को निखारने और उसे लगातार मौके देने के बजाय इस तरह बीच मझधार में बाहर कर देना उसकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालता है, जिसकी आलोचना अब पूरी दुनिया के क्रिकेट पंडित कर रहे हैं।
पूर्व पाकिस्तानी दिग्गज खिलाड़ियों ने उठाई आवाज: 'इस तरह से तो कभी तैयार नहीं होंगे नए मैच-विजेता'
सैम अयूब के साथ हुए इस कथित 'खेल' के बाद पाकिस्तान के पूर्व महान खिलाड़ियों ने पीसीबी की कार्यशैली की बखिया उधेड़ना शुरू कर दिया है। वसीम अक्रम, शोएब अख्तर और रमीज राजा जैसे दिग्गजों ने खुलकर सैम अयूब का समर्थन किया है। पूर्व खिलाड़ियों का कहना है कि दुनिया की सभी सफल टीमें (जैसे भारत और ऑस्ट्रेलिया) अपने युवा खिलाड़ियों को 10-15 मैचों का लंबा रन देती हैं ताकि वे अपने खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ढाल सकें। लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट में माहौल ऐसा बना दिया गया है कि खिलाड़ी हर मैच में टीम से बाहर होने के डर के साए में खेलता है। पूर्व कप्तानों ने सवाल किया कि जब आप 4 दिन का खराब पैच बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो फिर किसी युवा खिलाड़ी से निर्भीक और आक्रामक क्रिकेट खेलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
पीसीबी का आंतरिक बिखराव और लगातार बदलते फैसले: खिलाड़ियों में अविश्वास का माहौल
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में हाल के दिनों में हुए प्रशासनिक और कोचिंग स्टाफ के बदलावों का सीधा असर मैदान पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर दिख रहा है। कप्तान, कोच और चयन समिति के बीच तालमेल की कमी के कारण आए दिन नए फैसले लिए जा रहे हैं। कभी बाबर आजम और शाहीन अफरीदी को कप्तानी से हटाना तो कभी सैम अयूब जैसे स्थापित होते युवा को अचानक बाहर का रास्ता दिखाना, यह दर्शाता है कि पीसीबी के पास कोई दीर्घकालिक दृष्टिकोण नहीं है। टीम के अंदर असुरक्षा का माहौल इतना बढ़ गया है कि खिलाड़ी अपनी जगह बचाने के लिए रक्षात्मक खेल खेलने को मजबूर हो रहे हैं। सैम अयूब जैसे नेचुरल स्ट्राइकर को इस तरह ड्रॉप करने से घरेलू क्रिकेट में मेहनत कर रहे अन्य युवा खिलाड़ियों का भी मनोबल टूट रहा है।
सैम अयूब का आगे का रास्ता: क्या घरेलू क्रिकेट में दोबारा खुद को साबित कर पाएंगे युवा स्टार?
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से इस तरह अचानक बाहर किए जाने के बाद अब सैम अयूब के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती है। पीसीबी के इस फैसले के बाद उन्हें अब वापस जाकर घरेलू प्रतियोगिताओं में भारी रन बनाने होंगे ताकि वे चयनकर्ताओं के मुंह पर अपने बल्ले से ताला लगा सकें। हालांकि, सैम अयूब के पास वह काबिलियत, तकनीक और आक्रामकता है जो उन्हें दुनिया के किसी भी गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ रन बनाने की ताकत देती है। फैंस को उम्मीद है कि सैम अयूब इस झटके से उबरकर और मजबूत बनकर वापसी करेंगे, लेकिन पीसीबी द्वारा किए गए इस 'खेल' ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान क्रिकेट में प्रतिभा से ज्यादा अनिश्चितता का राज चलता है।