ऑक्शन से पहले बढ़ा मुंबई इंडियंस का सिरदर्द: ₹90 लाख में खरीदने हैं 6 खिलाड़ी

ऑक्शन से पहले बढ़ा मुंबई इंडियंस का सिरदर्द: ₹90 लाख में खरीदने हैं 6 खिलाड़ी

आईपीएल (IPL) के आगामी सीजन के मेगा ऑक्शन से पहले पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) की मुश्किलें अचानक काफी बढ़ गई हैं। फ्रेंचाइजी ने अपने कई स्टार खिलाड़ियों को रिटेन करने के बाद अपनी पर्स वैल्यू और स्क्वाड की जरूरतों का जो गणित बैठाया है, उसने टीम मैनेजमेंट और कोचिंग स्टाफ की नींद उड़ा दी है। मौजूदा नियमों के तहत मुंबई इंडियंस के पास ऑक्शन टेबल पर उतरने के लिए पर्स में बेहद सीमित यानी मात्र 90 लाख रुपये की राशि बची है, जबकि उन्हें अपनी टीम का कोटा पूरा करने के लिए अभी भी कुल 6 खाली स्लॉट भरने हैं। इतने कम बजट में इतने सारे खिलाड़ियों को खरीदना किसी चुनौती से कम नहीं है, और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि टीम बिना अनुभव वाले बैकअप या सस्ते विकल्पों के साथ एक मजबूत और भरोसेमंद विकेटकीपर की तलाश कैसे पूरी करेगी। आइए विस्तार से जानते हैं कि मुंबई इंडियंस के सामने ऑक्शन से पहले कौन-कौन सी बड़ी रणनीतिक समस्याएं खड़ी हो गई हैं और वे इस संकट से कैसे पार पा सकते हैं।

#1 मुंबई इंडियंस का बचा हुआ पर्स और खिलाड़ियों का खाली कोटा: क्या है असली गणित?

किसी भी आईपीएल फ्रेंचाइजी के लिए ऑक्शन में उतरने से पहले पैसों का प्रबंधन और खिलाड़ियों का संतुलन सबसे अहम होता है। मुंबई इंडियंस ने अपनी पुरानी कोर टीम को बचाए रखने के लिए बड़ी रकम खर्च कर दी है, जिसके चलते उनके पास अब पर्स में केवल 90 लाख रुपये ही शेष बचे हैं। दूसरी ओर, आईपीएल नियमों के अनुसार प्रत्येक टीम के स्क्वाड में कम से कम 18 और अधिकतम 25 खिलाड़ी होने अनिवार्य हैं। मुंबई के पास वर्तमान में रिटेन किए गए खिलाड़ियों को मिलाकर कुल संख्या का जो समीकरण बन रहा है, उसके अनुसार उन्हें अपने बचे हुए 6 रिक्त स्थानों (Slots) को भरने के लिए यही 90 लाख रुपये खर्च करने होंगे। गणितीय रूप से देखा जाए तो एक खिलाड़ी के हिस्से में औसतन मात्र 15 लाख रुपये का बजट आ रहा है, जिसमें किसी बड़े और अनुभवी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को खरीदना असंभव सा नजर आता है।

#1 सबसे बड़ी चुनौती: कम बजट में एक भरोसेमंद और आक्रामक विकेटकीपर की तलाश

मुंबई इंडियंस के सामने इस वक्त सबसे गंभीर समस्या विकेटकीपर (Wicketkeeper-Batsman) की तलाश को लेकर है। टीम को मध्यक्रम में तेजी से रन बनाने वाले और विकेट के पीछे बिजली की फुर्ती दिखाने वाले एक क्वालिटी कीपर की सख्त जरूरत है। ईशान किशन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के रिलीज होने या अन्य टीमों में चले जाने के बाद अब मुंबई के पास विकेटकीपिंग डिपार्टमेंट में अनुभव की भारी कमी है। मात्र 15-20 लाख रुपये के औसत बजट में किसी बेहतरीन विकेटकीपर को अपने साथ जोड़ना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। फ्रेंचाइजी के स्काउट्स (Scouts) को अब घरेलू क्रिकेट (Domestic Cricket) और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के उन युवा और अनकैप्ड (Uncapped) खिलाड़ियों पर दांव लगाना होगा जो कम पैसों में बड़ा प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।

#1 अनकैप्ड खिलाड़ियों और घरेलू टैलेंट पर टिकी मुंबई की निगाहें

ऐसी विकट परिस्थितियों में मुंबई इंडियंस का प्रसिद्ध टैलेंट स्काउट नेटवर्क ही उनकी एकमात्र उम्मीद बचा है। इतिहास गवाह है कि मुंबई इंडियंस ने अतीत में जसप्रीत बुमराह, सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा जैसे अनकैप्ड खिलाड़ियों को कम कीमत पर चुनकर उन्हें सुपरस्टार बनाया है। इस बार भी फ्रेंचाइजी को देश के उन युवा घरेलू विकेटकीपर-बल्लेबाजों पर अपनी नजरें टिकानी होंगी जो अंडर-19 या रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और जिन्हें ऑक्शन में बड़ी बेस प्राइस (Base Price) के बिना खरीदा जा सकता है। इसके अलावा, कुछ ऐसे विदेशी खिलाड़ियों पर भी दांव खेला जा सकता है जो कम पैसों में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हों और टीम के कॉम्बिनेशन में पूरी तरह फिट बैठ सकें।

#1 क्या रोहित शर्मा और हार्दिक पंड्या की रणनीति आएगी काम?

मुंबई इंडियंस के खेमे में कप्तान हार्दिक पंड्या, मुख्य कोच महेला जयवर्धने और सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा का अनुभव इस मुश्किल समय में टीम के बहुत काम आ सकता है। ऑक्शन टेबल पर कम बजट के साथ स्मार्ट बिडिंग (Smart Bidding) करना एक बहुत बड़ा हुनर है। टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होगा कि वे अपने 90 लाख रुपये के बजट को किस तरह से अलग-अलग खिलाड़ियों की बेस प्राइस पर डिस्ट्रीब्यूट करें ताकि कोई भी स्लॉट खाली न रहे और टीम के सभी विभागों में संतुलन बना रहे। यदि मुंबई इस बार भी अपनी पुरानी रणनीति के तहत छुपे रुस्तम खिलाड़ियों को ढूंढने में कामयाब हो जाती है, तो उनका यह कम बजट का स्क्वाड भी मैदान पर बड़ा उलटफेर कर सकता है।