1 अक्टूबर से बदल गया सैलरी का गणित, अब हर महीने मिलेंगे इतने हजार रुपये

1 अक्टूबर से बदल गया सैलरी का गणित, अब हर महीने मिलेंगे इतने हजार रुपये

राजस्थान की भजनलाल शर्मा नीत राज्य सरकार ने प्रदेश के ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ मानी जाने वाली 'आशा सहयोगिनियों' (Asha Sahyogini) के लिए एक बेहद राहतभरी और बड़ी सौगात दी है। राज्य सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आशा सहयोगिनियों के मानदेय में की गई ऐतिहासिक बढ़ोतरी को लागू करने के लिए आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। संशोधित मानदेय दरें 1 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई हैं। सरकार के इस जनहितैषी और कल्याणकारी फैसले से प्रदेश की 50 हजार से भी अधिक आशा सहयोगिनियों के चेहरे खिल उठे हैं। लंबे समय से अपने मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि और समय पर भुगतान की मांग कर रही महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को अब हर महीने बैंक खाते में बढ़ी हुई राशि प्राप्त होगी। आइए विस्तार से जानते हैं कि राजस्थान सरकार द्वारा आशा सहयोगिनियों की सैलरी में कितना इजाफा किया गया है, नया पे-स्ट्रक्चर क्या है और उन्हें कुल मिलाकर हर महीने कितने रुपये मिलेंगे।

#1 1 अक्टूबर से लागू हुआ नया मानदेय: जानिए अब हर महीने कितने रुपये मिलेंगे?

राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, आशा सहयोगिनियों के राज्य मद से मिलने वाले निश्चित मानदेय (Fixed Honorarium) में सीधे 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इस संशोधन के बाद आशा सहयोगिनियों को मिलने वाले मासिक वेतन का पूरा गणित बदल गया है:

  • संशोधित राज्य मानदेय: पहले आशा सहयोगिनियों को राज्य सरकार की ओर से प्रतिमाह ₹4,094 का निश्चित मानदेय मिलता था, जो 15% की वृद्धि के बाद बढ़कर अब ₹4,708 प्रति माह हो गया है।

  • टास्क बेस्ड इंसेंटिव्स (Incentives & Allowances): राज्य सरकार के इस फिक्स्ड मानदेय के अलावा आशा सहयोगिनियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों, जैसे—टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery), परिवार कल्याण कार्यक्रमों और नवजात शिशु देखभाल के लिए अलग से इंसेंटिव दिया जाता है।

  • कुल मासिक आय: फिक्स्ड मानदेय और इंसेंटिव मिलाकर अब एक आशा सहयोगिनी हर महीने औसतन ₹8,000 से ₹10,000 रुपये तक आसानी से अर्जित कर सकेगी।

#1 बजट घोषणा को दिया गया अमलीजामा, 50 हजार से अधिक महिलाओं को सीधा फायदा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा विधानसभा में पेश किए गए राज्य के बजट भाषण के दौरान आशा सहयोगिनियों के मानदेय में 15 फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान किया गया था। अब चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इसके प्रशासनिक और वित्तीय आदेश जारी होने से इस घोषणा को धरातल पर पूरी तरह लागू कर दिया गया है। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा, अजमेर, भरतपुर और शेखावाटी समेत राजस्थान के सभी 50 जिलों में कार्यरत लगभग 55,000 से अधिक आशा सहयोगिनियों को इस बढ़ोतरी का सीधा वित्तीय लाभ मिलेगा। दीपावली और आगामी त्योहारों के सीजन में मानदेय बढ़ने की इस खबर से महिला कार्यकर्ताओं के परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

#1 ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की धुरी हैं आशा सहयोगिनी: जानिए इनका महत्वपूर्ण योगदान

राजस्थान जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल वाले राज्य में ग्रामीण इलाकों, ढाणियों और दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों तक सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में आशा सहयोगिनियों की भूमिका अद्वितीय और सराहनीय रही है। ये महिला कार्यकर्ता घर-घर जाकर गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण कराती हैं, उन्हें समय पर प्रसव के लिए एम्बुलेंस (108/104) उपलब्ध कराने में मदद करती हैं, और नवजात शिशुओं के पोषण व कुपोषण की जांच करती हैं। इसके अलावा मौसमी बीमारियों (डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया) के प्रकोप के दौरान घर-घर सर्वे करने और दवाओं का वितरण करने की मुख्य जिम्मेदारी भी इन्हीं के कंधों पर होती है। कोरोना महामारी के समय भी आशा कार्यकर्ताओं ने अग्रिम पंक्ति (Frontline Workers) में रहकर जनसेवा का बेमिसाल उदाहरण पेश किया था।

#1 मानदेय बढ़ाने के साथ-साथ समय पर बैंक ट्रांसफर के सख्त निर्देश

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS Health) और मिशन निदेशक (NHM) ने राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि हर महीने की पहली तारीख को आशा सहयोगिनियों का बढ़ा हुआ मानदेय सीधे उनके बैंक खातों में 'डाइरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' (DBT) के माध्यम से ट्रांसफर किया जाए। मानदेय के भुगतान में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी या लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त आशा सहयोगिनियों के लिए डिजिटल ट्रेनिंग, स्मार्ट मोबाइल फोन कनेक्टिविटी और यूनिफॉर्म भत्ते को लेकर भी विभाग द्वारा नए प्रस्तावों पर काम किया जा रहा है।

#1 आशा संगठनों ने जताया मुख्यमंत्री का आभार, नियमित करने की मांग भी दोहराई

मानदेय में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का आदेश जारी होने के बाद प्रदेश के विभिन्न आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघों और महिला संगठनों ने खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में यह बढ़ोतरी एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन वे सरकार से मांग करते हैं कि लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रही आशा सहयोगिनियों को राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर स्थायी (Regularize) किया जाए और एक निश्चित न्यूनतम वेतन ढांचा लागू किया जाए। बहरहाल, 1 अक्टूबर से सैलरी में हुए इस इजाफे ने आशा कार्यकर्ताओं की आर्थिक स्थिति को काफी हद तक संबल देने का काम किया है।