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April 03 2026 12:23 am

खाड़ी में महायुद्ध की आहट ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जे की तैयारी में अमेरिका, सैकड़ों पैराट्रूपर्स की तैनाती से दुनिया में हड़कंप

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News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव के बीच एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं को हवा दे दी है। रक्षा सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक तेल टर्मिनल 'खर्ग द्वीप' (Kharg Island) को अपने नियंत्रण में लेने की गुप्त योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अमेरिका ने अपने सैकड़ों जांबाज पैराट्रूपर्स (Paratroopers) को खाड़ी क्षेत्र के बेहद करीब तैनात कर दिया है। व्हाइट हाउस की इस घेराबंदी ने न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार में खलबली मचा दी है।

क्यों खास है खर्ग द्वीप? ईरान की अर्थव्यवस्था की 'शह रग' पर निशाना

ईरान का खर्ग द्वीप कोई साधारण टापू नहीं है, बल्कि यह ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ईरान का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल इसी टर्मिनल से होकर दुनिया भर के बाजारों में पहुंचता है। अगर अमेरिका इस द्वीप पर कब्जा करने या इसकी घेराबंदी करने में सफल रहता है, तो ईरान की आर्थिक ताकत पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम ईरान को घुटनों पर लाने के लिए एक 'मास्टरस्ट्रोक' हो सकता है, लेकिन इसके परिणाम भीषण युद्ध के रूप में भी सामने आ सकते हैं।

सैकड़ों अमेरिकी पैराट्रूपर्स का 'सीक्रेट मिशन' और युद्ध की तैयारी

पेंटागन की ओर से इस तैनाती पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों ने अमेरिका की बड़ी हलचल की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि इन पैराट्रूपर्स को विशेष रूप से 'कमांडो रेड' और टापुओं पर कब्जे की ट्रेनिंग दी गई है। इस तैनाती का सीधा मतलब है कि अगर ईरान की ओर से कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई होती है, तो अमेरिकी सेना बिना समय गंवाए सीधे खर्ग द्वीप पर हवाई हमला या लैंडिंग कर सकती है। खाड़ी में मौजूद अमेरिकी युद्धपोत और विमान वाहक पहले से ही 'हाई अलर्ट' मोड पर हैं।

तेल की कीमतों में आग लगने का डर, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस तनाव का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। जानकारों का कहना है कि अगर खर्ग द्वीप के पास एक भी गोली चली, तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इससे पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू सकते हैं। दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ अब इस कोशिश में जुटे हैं कि किसी भी तरह अमेरिका और ईरान को सीधी जंग से रोका जा सके, वरना इसका अंजाम पूरी मानवता के लिए विनाशकारी होगा।