Somnath Swabhiman Parv : एक हजार साल का दर्द और फिर से उठ खड़े होने की गौरवगाथा, जिसे हर भारतीय को जानना चाहिए

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News India Live, Digital Desk : जब भी भारत के इतिहास की बात होती है, सोमनाथ मंदिर का जिक्र जरूर आता है। लेकिन सोमनाथ सिर्फ पत्थरों से बना एक मंदिर नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे की निशानी है जो बताता है कि सत्य को कितनी भी बार कुचलने की कोशिश की जाए, वह फिर से खड़ा हो जाता है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' की शुरुआत की है। इस मौके पर उनके शब्द हर भारतीय के दिल को छू गए। उन्होंने सोमनाथ को सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की 'रेजि Resilience' (अटूट शक्ति) का प्रतीक बताया। यह पर्व हमारी उस 1000 साल पुरानी विरासत को याद करने का तरीका है, जिसे समय-समय पर विदेशी हमलावरों ने मिटाने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे।

क्यों खास है 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व'?
अगर आप सोमनाथ के इतिहास को देखें, तो यह मंदिर विनाश और निर्माण की एक अद्भुत दास्तान है। सदियों पहले जब इसे बार-बार लूटा और तोड़ा गया, तो हमलावरों को लगा होगा कि उन्होंने भारत की आस्था को खत्म कर दिया। लेकिन हर बार, भारत के लोगों ने उसे और भी भव्यता के साथ बनाया।

आज (जनवरी 2026) में पीएम मोदी ने जब इस पर्व की शुरुआत की, तो उनका संदेश साफ था—यह पर्व उन पीढ़ियों के प्रति हमारा सम्मान है जिन्होंने अपनी संस्कृति को बचाने के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दिया। यह 1000 साल की वह लेगेसी है जो हमें आज के आधुनिक भारत में भी 'स्वाभिमान' के साथ सिर उठाकर जीना सिखाती है।

अतुल्य भारत का प्रतीक
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर दुनिया को दिखाता है कि आप इमारतों को गिरा सकते हैं, लेकिन उस राष्ट्र की चेतना को नहीं मार सकते जिसके दिल में अपना इतिहास जिंदा है। 'स्वाभिमान पर्व' का मकसद नई पीढ़ी को हमारे अतीत की इस शक्ति से रूबरू कराना है। जब युवा देखेंगे कि उनका देश संघर्षों से तपकर बाहर आया है, तो उनमें भविष्य की चुनौतियों से लड़ने का एक अलग ही आत्मविश्वास पैदा होगा।

विरासत के साथ विकास
आज का भारत जहाँ एआई (AI) और अंतरिक्ष विज्ञान की बात करता है, वहीं सोमनाथ जैसी धरोहरों को संभालना हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। पीएम का यह कदम सांस्कृतिक चेतना को जगाने का एक बड़ा जरिया है। इसे 'अभिमान' नहीं बल्कि 'स्वाभिमान' कहा गया है, क्योंकि अभिमान में अहंकार होता है, लेकिन स्वाभिमान में अपने पूर्वजों और संस्कृति के प्रति कृतज्ञता होती है